महाभारत के पात्र विदुर का नाम तो सुना होगा? जैसे चाणक्य नीति पढ़ी जाती है, वैसे ही नीति के कई श्लोक विदुर नीति के भी सुनाये जाते हैं। ऐसा माना जाता था कि सही फैसले लेने के लिए हमेशा उनकी सलाह ली जाती थी। लेकिन वो हमेशा सही निर्णय दे पायेंगे ऐसा क्यों माना जाता था? इसके पीछे एक दूसरी कहानी आती है।

 

तो होता यूँ है कि एक राजा की राजधानी में चोरी की घटनाएँ बढ़ने लगीं। राजा ने तय किया कि संभवतः कोई चोरों का दल नगर के आस-पास आ बसा है। न्यायाधीशों, कोतवालों को चोरों के दल को ढूँढने और दण्डित करने का आदेश जारी हुआ। राजा के सिपाही काम पर लग गए और एक रात कुछ शोर सुनकर वो हंगामे की तरफ भागे। चोर भीड़ से बचकर भाग चुके थे लेकिन क़दमों के निशानों के सहारे सिपाहियों ने चोरों का पीछा किया।

 

वन में कुछ दूर भागने पर चोरों को समझ में आ गया कि सिपाही पीछा नहीं छोड़ रहे। चुनांचे उन्होंने कहीं छुपकर जान बचाने की सोची। बार-बार चोरी का दंड उस दौर में सूली पर टांगना होता। थोड़ी ही देर ढूँढने पर उन्हें पेड़ के नीचे ध्यानमग्न एक साधू दिखे। ये ऋषि मंडव्य थे जो मत्स्य पुराण के कुछ हिस्से लिखने के लिए भी जाने जाते हैं। चोरों ने वहीँ ऋषि के आश्रम में चोरी का माल छुपाया और खुद भी छुप गए।

 

उन्हें लगा था कि सिपाही ऋषि के आश्रम की तलाशी नहीं लेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। चोर पकड़े गए माल बरामद हुआ और सिपाहियों के प्रमुख ने ऋषि से पूछताछ करनी चाही। ऋषि ध्यान में थे, क्या सुनते, क्या जवाब देते? सिपाहियों को लगा ये कोई ढोंगी है जो चोरों से ही मिला हुआ है। वो ऋषि मंडव्य को भी टांगकर राजधानी ले चले। चोरी के माल के साथ पकड़े गए चोरों को अगले ही दिन न्यायाधीश ने सूली पर चढ़ा देने का आदेश दिया।

 

भारतीय सूली ईसाइयों वाले क्रॉस जैसी नहीं होती थी। ये एक कांटे जैसा होता था जिसपर बैठा मुजरिम अपने ही वजन से अपने शरीर में इसे घुसने से रोक नहीं पाता। अब चोर तो थोड़ी ही देर में सूली पर टंग गए मगर ऋषि मंडव्य अपने तपोबल से सूली के ऊपर ही पद्मासन में ध्यानमग्न रहे। शाम होते होते-होते नगर में हल्ला मचा। न्यायाधीश को पता चला कि कोई सूली के ऊपर ही अटका है, नीचे आता ही नहीं तो वो भी पहुंचा।

 

राजा को खबर हुई तो उन्हें भी समझ में आया कि किसी बेकसूर को सजा दे डाली है। ऋषि उठते ही कहीं शाप ना दें, इसलिए वो भी भागा-भागा पहुंचा और साष्टांग दंडवत ऋषि के सामने लोट गया। थोड़ी देर में ऋषि मंडव्य का ध्यान भंग हुआ तो वो सूली से नीचे उतरे। भीड़ लगी देखकर राजा से पूछा कि मामला क्या है? पूरी बात पता चलने पर बोले, ये तुम्हारी गलती नहीं, मुझसे ही कोई पाप हुआ होगा, जिसके दंड में धर्मराज ने ये विधान रचा होगा।

 

राजा से विदा लेकर ऋषि मंडव्य सीधा धर्मराज (यमराज) के पास पहुंचे और पूछा की उन्हें किस पाप का ये दंड मिला है? धर्मराज ने बताया की बचपन में वो तितलियों को सूई से बींधकर पीछे टंगा धागा पकड़कर उन्हें उड़ाने का खेल खेलते थे। सूली से बींधने का दंड उसी के बदले में था। ऋषि मंडव्य ने पूछा ये करते समय वो कितने बड़े थे? जब पता चला कि वो बारह वर्ष से कम आयु के थे, तो वो बोले कि इस आयु में तो पाप-पुण्य दोनों माफ़ होते हैं!

 

धर्मराज को समझ में आया कि उनसे जोड़ने में गलती हो गयी है। बेमतलब ही दंड देने के लिए अपनी शक्ति का दुरूपयोग करने के लिए ऋषि मंडव्य ने धर्मराज को धरती पर जन्म लेने का शाप दिया था। इस शाप का नतीजा था कि यमराज को विदुर के रूप में धरती पर जन्म लेना पड़ा था। उनके सीधे यमराज के अवतार होने के कारण ही जब हस्तिनापुर के दरबार में श्री कृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाया तो उन्हें आँखें नहीं बंद करनी पड़ी थीं।

 

तो मुद्दा ये है कि आपने दर्जन भर बार अच्छे काम किये थे, इसलिए आपकी एक गलती माफ़ हो जायेगी, ऐसे हिन्दुओं का कर्मफल का सिद्धांत नहीं चलता। गलतियों के लिए देवताओं को भी दंड झेलना पड़ता है। दूसरे छोटे-मोटे मजहबों में जो रसुलीकरण की प्रक्रिया होती है, वैसे यहाँ एक आदमी हर गुनाह से ऊपर नहीं हो जाता। दूसरा ये कि बच्चे के लिए कानून अलग होता और बड़े के लिए अलग, इसका पालन नहीं करने के लिए यमराज को दण्डित किया गया था। भारत में बच्चों के लिए शायद हमेशा से ही कानून अलग होते हैं।

 

बीच के फिरंगियों के उपनिवेशवादी शासन या दूसरे हमलावरों के काल में इसका उतनी सख्ती से शायद पालन नहीं हुआ। समय बदला और अंतिम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब स्थितियां बेहतर हुई तो लोगों का ध्यान इस ओर फिर से गया। बच्चों के प्रति अपराधों की गिनती जब बढ़ने लगी तो भारत में नए कानून भी बने। इन नए कानूनों में सबसे प्रमुखता से पोक्सो एक्ट (2019) और जुविनाइल जस्टिस एक्ट की बात होती है। पोस्को एक्ट की धारा 23 और जेजे एक्ट की धारा 74 के तहत किसी भी तरीके से यौन शोषण/बलात्कार आदि मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना गैर जमानती अपराध है!

 

अब सवाल उठता है कि क्या इन कानूनों के बारे में पता नहीं होने पर आप कह सकते हैं कि गलती हो गयी? तो इसे आप सीधे से सड़क पर गाड़ी चलाते समय लाल बत्ती कूद जाने से मिलाकर देख लीजिये। आपने लाल बत्ती नहीं देखी, ध्यान सड़क पर दूसरी ओर था, ये कोई तर्क नहीं होता चालान से बचने का। आपको कानून पता ही नहीं था, इसलिए आप गैरकानूनी हरकत कर बैठे हैं, ये तर्क भी अदालतें नहीं मानती। जो राहुल गांधी ने किया है वो गैरजमानती अपराध है और उसके लिए भारत के किसी भी दूसरे नागरिक की ही तरह उन्हें भी जेल में डालना चाहिए।

 

हाँ, रीढ़ की हड्डी में दम न हो तो और बात है। ऐसा भी हो सकता है कि भारत का संविधान और कानून सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं होता, ये सरकार बहादुर साबित करना चाहती हो। ऐसे मामले में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख रह चुके कांग्रेस प्रमुख के बेटे के लिए आम आदमी पर लगने वाला कानून लागू होगा या नहीं होगा, ये एक बड़ा सवाल होता है। ये शायद हम लोग “नो वन किल्ड जेस्सिका” वाले मामले में देख चुके हैं जब एक भूतपूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेसी परिवार से आने वाले हत्यारे को सजा हो ही नहीं पा रही थी और जब हुई भी तो उसने जेल की सजा काटते-काटते में ही शादी-वादी भी कर ली थी!

 

बाकी छप्पन इंची कह देने भर से कुछ भी छप्पन इंची तो नहीं ही होता है। राजदंड के प्रयोग के लिए सचमुच छप्पन इंची है या नहीं, ये भी देखने लायक होगा!

 

 

(पता चला है कि ये कथा थोड़े अंतर के साथ श्रीमद् भागवतपुराण में भी आती है, वैसे महाभारत में ये आदि पर्व के 107वें अध्याय में आता है। तस्वीर इन्टरनेट से साभार।)

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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