राजनीति साधन नहीं है, मगर आज के दौर में यह साधन बन चुकी है। जब दुश्मन आपसे अधिक शक्तिशाली हो, तो उसे साथ मिला लो; अगर वह तैयार न हो, तो दोस्ती कर लो या फिर पीछे हट जाओ। इतिहास में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं—जरासंध कृष्ण से अधिक शक्तिशाली था, इसलिए कृष्ण को रण छोड़ना पड़ा और उन्हें “रणछोड़” कहा गया।

आज की राजनीति में भी यही रणनीति दिखाई देती है। राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के भीतर जिस स्थिति का सामना करना पड़ा, उसने उन्हें विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। भाजपा ने इस परिस्थिति को अवसर में बदला और राज्यसभा में अपनी स्थिति को और मजबूत किया। राजनीति में एक दुश्मन का दोस्त बन जाना असामान्य नहीं है।

असम में हेमंत बिस्वा सरमा का उदाहरण हमारे सामने है, जिन्हें कांग्रेस संभाल नहीं पाई। अंततः उन्होंने भाजपा का रुख किया और आज राज्य के मुख्यमंत्री हैं। इसी तरह बिहार में भी गैर-आरएसएस पृष्ठभूमि के नेताओं को भाजपा ने स्थान दिया है। सम्राट चौधरी इसका उदाहरण हैं—शिक्षा या पृष्ठभूमि से अधिक, जनता का समर्थन राजनीति में निर्णायक होता है।

राघव चड्ढा के पास विकल्प सीमित थे, जैसे हेमंत सरमा के पास थे। वे एक संपन्न परिवार से आते हैं, सक्षम हैं और किसी पर निर्भर नहीं हैं। सवाल यह नहीं है कि उन्होंने क्या किया, बल्कि यह है कि आगे क्या करेंगे—क्या वे आम जनता के मुद्दे उठाते रहेंगे या सत्ता की जटिलताओं में उलझ जाएंगे?

यह भी सोचना होगा कि आम आदमी पार्टी के भीतर ऐसी स्थिति क्यों बनी। क्या गलती सिर्फ इतनी थी कि राघव चड्ढा “तेल मालिश” की राजनीति नहीं कर पाए? अगर हर नेता सिर्फ सत्ता और सुविधा के लिए झुकता, तो जनहित के मुद्दे कौन उठाता?

केजरीवाल की राजनीति में “ईमानदारी” एक केंद्रीय विचार रहा है, लेकिन कहीं यह एक मोह तो नहीं बन गया? इतिहास में भी भीष्म पितामह अपने व्रत के मोह में बंधे रहे और अंततः पराजित हुए। यदि नेतृत्व जिद और मोह में फंस जाए, तो संगठन कमजोर हो जाता है।

देश के स्तर पर देखें तो भाजपा और कांग्रेस के बाद एक तीसरा विकल्प उभरा था, लेकिन आंतरिक निर्णय और नेतृत्व शैली उस विकल्प को कमजोर कर सकती है। राजनीति में संतुलन और संवाद आवश्यक है।

आर्थिक मोर्चे पर स्थिति चुनौतीपूर्ण है। महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है। वैश्विक राजनीति, महामारी और अन्य कारणों का प्रभाव जरूर है, लेकिन अंततः जिम्मेदारी सत्ता के पास ही आती है। जनता सवाल पूछती है और जवाब चाहती है।

आलोचना को दबाना या आलोचकों को चुप कराना समाधान नहीं है। लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए। भारत की जनता जागरूक है और समय आने पर प्रतिक्रिया देती है।

यह देश गांधी और भगत सिंह की भूमि है। यहां विचारों का सम्मान होना चाहिए, न कि दमन। यदि व्यवस्था जनता की आवाज़ को अनसुना करती है, तो असंतोष बढ़ता है।

अंततः राजनीति का केंद्र जनता ही है, न कि नेता या पार्टी। जो इसे समझता है, वही टिकता है।

बहरहाल, यह था बदलती राजनीति और देश के हालात पर एक नजर। शाम को “स्वास्थ्य” विषय पर फिर मुलाकात होगी।

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राधे राधे।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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