लेखक: डिम्पी मिश्रा Aware News 24 डेस्क

उमर अब्दुल्ला का शराब की बिक्री को लेकर दिया गया बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है। बढ़ती आलोचना, सोशल मीडिया मीम्स और विपक्षी हमलों के बाद मुख्यमंत्री को अपना बयान वापस लेना पड़ा।


क्या था पूरा विवाद?

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शराबबंदी की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था:

👉 “कोई किसी को शराब पीने के लिए मजबूर नहीं कर रहा।”

इस बयान के बाद:

  • सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
  • पुराने वीडियो वायरल
  • विपक्षी दलों का हमला
  • खुद उनकी पार्टी के नेताओं की नाराजगी

बैकफुट पर CM: बयान वापस लेना पड़ा

विवाद बढ़ने पर उमर अब्दुल्ला ने सफाई देते हुए कहा:

👉 “यह बिना संदर्भ के जल्दबाजी में दिया गया बयान था।”

उन्होंने आगे कहा:

  • इस्लाम शराब की अनुमति नहीं देता
  • सरकार शराब को बढ़ावा नहीं देती
  • लेकिन जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग धर्म और विचारधारा के लोग रहते हैं
  • पर्यटक और बाहरी कामगार भी यहां आते हैं

अपनों ने भी घेरा: रुहुल्लाह की खुली नाराजगी

आगा सैयद रुहुल्लाह ने भी शराब की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की।

उन्होंने कहा:

👉 “शराब की उपलब्धता के कारण स्थानीय युवा भी इसकी ओर बढ़ रहे हैं।”
👉 “अगर ड्रग्स के खिलाफ सख्ती हो सकती है, तो शराब नीति पर क्यों नहीं?”


PDP का हमला: “रुख बदल रही है सरकार”

इल्तिजा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार पर आरोप लगाया कि:

👉 “सरकार अपना पुराना रुख बदल रही है।”

उन्होंने कहा:

  • कोई धर्म नशे का समर्थन नहीं करता
  • शराब और ड्रग्स दोनों समाज के लिए नुकसानदायक
  • मुस्लिम-बहुल राज्य की भावनाओं की अनदेखी हो रही है

BJP का अलग रुख: “कानून से सब नहीं रुकता”

भारतीय जनता पार्टी ने उमर अब्दुल्ला का अप्रत्यक्ष समर्थन किया।

भाजपा नेता अशोक कौल ने कहा:

👉 “सिर्फ कानून बनाकर शराब की खपत नहीं रोकी जा सकती।”
👉 “जागरूकता ज्यादा जरूरी है।”


विश्लेषण: शराब का मुद्दा या पहचान की राजनीति?

यह विवाद केवल शराब नीति तक सीमित नहीं है।

इसके पीछे कई स्तर हैं:

1. धार्मिक भावनाएं

जम्मू-कश्मीर की मुस्लिम-बहुल आबादी में शराब का मुद्दा संवेदनशील है।

2. पर्यटन बनाम सामाजिक दबाव

सरकार पर्यटन और स्थानीय भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

3. राजनीतिक अवसर

विपक्ष इस मुद्दे को
👉 “पहचान और संस्कृति” से जोड़कर पेश कर रहा है।


निष्कर्ष: बयान से ज्यादा बड़ा बन गया राजनीतिक संदेश

उमर अब्दुल्ला का बयान अब सिर्फ एक टिप्पणी नहीं रहा,
👉 बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति में
“संस्कृति बनाम व्यावहारिक शासन” की बहस बन गया है।

अब देखना होगा:

  • सरकार शराब नीति में कोई बदलाव करती है या नहीं
  • और यह मुद्दा आने वाले राजनीतिक समीकरणों को कितना प्रभावित करता है

By Aware News 24

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