लेखक: डिम्पी मिश्रा, Aware News 24 डेस्क
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ ने मंगलवार (12 मई 2026) को कथित NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर नई दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और कांग्रेस की छात्र इकाई के कार्यकर्ता शामिल हुए।
शास्त्री भवन के बाहर भारी प्रदर्शन
शास्त्री भवन के बाहर:
- भारी पुलिस बल तैनात रहा
- बैरिकेडिंग की गई
- प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए:
👉 “छात्रों पर अत्याचार बंद करो”
👉 “पेपर लीक, मोदी सरकार कमजोर”
👉 “डॉक्टर की डिग्री बिकाऊ है”
क्या है पूरा मामला?
- NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को हुई थी
- इसके बाद कथित पेपर लीक के आरोप सामने आए
- मामले की जांच:
- राजस्थान SOG
- CBI
द्वारा शुरू की गई।
इसके बाद NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और कहा कि:
👉 “परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।”
NTA का बयान: पारदर्शिता बनाए रखने का दावा
NTA के अनुसार:
👉 यह फैसला
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने
- और छात्रों का विश्वास बचाने
के लिए लिया गया।
सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द की गई।
NSUI का हमला: “यह छात्र आंदोलन की जीत”
NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा:
👉 “NEET रद्द होना छात्र शक्ति की जीत है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- शिक्षा मंत्रालय विफल रहा
- NTA भरोसेमंद परीक्षा कराने में असफल रही
- लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में डाला गया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
NSUI ने मांग की:
- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- NTA को पूरी तरह बंद करने की कार्रवाई
संगठन का आरोप है कि:
👉 लगातार विवादों ने छात्रों का भरोसा तोड़ दिया है।
विश्लेषण: सिर्फ पेपर लीक नहीं, भरोसे का संकट
यह विवाद केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है।
1. करोड़ों छात्रों की मानसिक परेशानी
- महीनों की तैयारी
- परीक्षा के बाद अनिश्चितता
- दोबारा परीक्षा का दबाव
2. NTA की विश्वसनीयता पर सवाल
लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में विवाद:
👉 सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
3. राजनीतिक मुद्दा बनता शिक्षा संकट
विपक्ष इस मुद्दे को:
👉 “युवा भविष्य बनाम सरकारी लापरवाही” के रूप में पेश कर रहा है।
निष्कर्ष: परीक्षा रद्द हुई, लेकिन सवाल बाकी हैं
NEET-UG 2026 रद्द होना
👉 सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं,
👉 बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली पर अविश्वास का संकेत बन चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल:
- क्या दोबारा परीक्षा निष्पक्ष होगी?
- क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
- और क्या छात्र फिर सिस्टम पर भरोसा कर पाएंगे?
