समाज के अंतिम व्यक्ति के समुचित विकास के प्रति मनोज श्रीवास्तव की प्रतिबद्धता बेमिसाल थी: प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी

पटना 19 अगस्त 2021: आज पटना के होटल मौर्या में इक्विटी फाउंडेशन एवं श्रीवास्तव परिवार के द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव की याद में “प्रथम मनोज श्रीवास्तव मेमोरियल लेक्चर 2021” का आयोजन किया गया. उनके बड़े पुत्र आई.आर.एस सागर श्रीवास्तव ने सभी लोगों का स्वागत करते हुए इस पहल के बारे में विस्तार से बताया.
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफ़ेसर अभिजीत विनायक बनर्जी वीडियो कॉल के ज़रिए यूरोप से शामिल हुए. उन्होंने अपने जेएनयू के सहपाठी से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि वे दोनों इकठ्ठा बैठकर विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत किया करते थे और इस दौरान काफ़ी कुछ सीखने को मिलता था. उनमें हर चीज़ की तह में जाकर उसके बारे में जानने की ज़बरदस्त भूख थी. बौद्धिक रुप से सक्षम होने के साथ-साथ उनमें समाज को बदलने की अदम्य इच्छा थी जो जीवनपर्यंत उनके साथ बनी रही. अंतिम व्यक्ति के समुचित विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनूठी थी. इसी कड़ी में उन्होंने कोविड महामारी की वजह से विकासशील देशों में शिक्षा व्यवस्था को हुए अपार नुकसान की चर्चा की. 2011-2016 के दौरान हुए असर सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पांचवीं कक्षा के 50 फीसदी छात्र दूसरी क्लास की पाठ्य-पुस्तकें पढ़ने में अक्षम पाए गए. इसके लिए ज़रूरी है कि बच्चों को उनकी ज़रूरत के मुताबिक़ शिक्षा उपलब्ध कराई जाए. हमारे द्वारा बिहार सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में स्कूली शिक्षा को लेकर किए गए शोध अध्ययनों से भी इस बात की पुष्टि हुई है जो मनोज श्रीवास्तव द्वारा तैयार की गयी ड्राफ्ट पालिसी से मिलती-जुलती थी.
कार्यक्रम में पटना के वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स मनोज श्रीवास्तव के सहकर्मियों व साथियों के अलावा एकेडमिक जगत और सिविल सोसाइटी से जुड़े लगभग 200 लोग सम्मिलित हुए और उन्हें श्रद्धांजलि दी.

 

इक्विटी फाउंडेशन के सहयोग से हुए पहले मेमोरियल लेक्चर में समाज के अलग अलग वर्गों ने आईएएस अधिकारी को याद किया

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं निवर्तमान लोकसभा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अमूमन प्रशासनिक सेवा में प्रतिस्पर्धा की भावना बहुत ज्यादा होती है. लेकिन मनोज जी जैसे अधिकारी अपने कामकाज और सबको साथ लेकर चलने की भावना की बदौलत अजातशत्रु की तरह थे. विभिन्न कैडर के अधिकारीयों द्वारा उनकी प्रशंसा इस बात का प्रमाण है.
राजद के राज्य सभा सांसद मनोज झा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा की सिविल सेवा में रहते हुए हायरार्की को चैलेंज करना सबसे लिए संभव नही होता. लेकिन मनोज जी ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारिओं को बखूबी निभाते हुए भी अपनी जनसरोकारी सोच से कभी समझौता नहीं किया.
कांग्रेस के राज्य सभा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि एक आईएएस होने के बावजूद भी उनमे पढ़ने और सीखने की ललक अंतिम समय तक बनी रही. रांची में बतौर डीडीसी किये गए उनके जनकल्याणकारी कार्यों के लिए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने उनकी सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी.
सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने उनके भोजपुर के डीएम कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि एक अधिकारी के रूप में उनका जनसरोकार अभिभूत करने वाला था. सूचना का अधिकार बिल आने के पूर्व ईपीडब्ल्यू में आमजन के सशक्तिकरण और समाज में आमूलचूल बदलाव के लिए इनफार्मेशन के महत्व पर उनका लिखा आलेख बेहद प्रभावी था.
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अशोक लवासा जो उनके बैचमेट भी रहे हैं ने मनोज जी को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर एक प्रशासनिक अधिकारी बताया जिनकी कमी आज बहुत खलती है.
बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक व्यासजी ने अपनी स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा कि मसूरी के आईएएस अकादमी में मैंने मनोज जी के रूप में जिस जिज्ञासु और बदलाव के लिए तत्पर युवा आईएएस ट्रेनी को देखा था, वह अपने पूरे सेवाकाल में वैसा ही बना रहा. पिछड़े तबके को लेकर उनके कमिटमेंट से वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेरणा लेनी चाहिए.
इस अवसर पर बोलते हुए बिहार के मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण काफी भावुक हो गए . उन्होंने कहा किउनकी स्मृतियों में अब भी हर समय उन्मुक्त रूप से हँसने वाले और जिंदादिल मनोज श्रीवास्तव जिन्दा हैं,
इस अवसर पर स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव की पत्नी और इक्विटी फाउंडेशन की निदेशक नीना श्रीवास्तव ने कहा कि यह एक पहल है और इसी बहाने हम उनकी विचारों, सपनों और जन साधारण के लिए उनके कुछ करने की चाहत को पूरा करने की कोशिश करेंगे .
पदम् श्री और प्रसिद्ध चिकित्सक विजय प्रकाश ने कहा कि उनका मनोज श्रीवास्तव के साथ 50 वर्षों से था वो परिवार की तरह थर उनका जाना हमारे लिय अपूरणीय क्षति है. कार्यक्रम का सञ्चालन मधुरिमा राज और मनोज श्रीवास्तव की सुपुत्री रौशनी ने किया. कार्यक्रम का धनयवाद ज्ञापन मनोज श्रीवास्तव के छोटे पुत्र शिखर श्रीवास्तव ने किया.

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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