मंगलवार 2 जून 2026 की रात पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हुई फायरिंग ने एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार 5 से 10 राउंड गोलियां चलने की बात सामने आई है। पुलिस जांच कर रही है और कोचिंग संस्थानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के एंगल से भी मामले को देख रही है।
लेकिन इस घटना को अगर सिर्फ एक दिन की घटना मान लिया जाए तो शायद हम बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज कर देंगे।
क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब खान सर या उनके संस्थान का नाम किसी हमले या हिंसक घटना से जुड़ा हो।
साल 2019 में पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान जीएस रिसर्च सेंटर पर अज्ञात बदमाशों ने बमबारी की थी। उस समय भी इलाके में दहशत फैल गई थी। कोचिंग परिसर में तोड़फोड़ हुई, बम फेंके गए और छात्रों के बीच अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस जांच में उस समय छात्रों और स्थानीय विवाद का एंगल भी सामने आया था।
बाद के वर्षों में भी विभिन्न मंचों और इंटरव्यू में खान सर स्वयं यह दावा करते रहे हैं कि उनके संस्थान को निशाना बनाया गया था और कोचिंग जगत में बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
अब 2026 में फिर से फायरिंग।
सवाल यह है कि आखिर ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है?
पटना का मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी और आसपास का इलाका केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं है। यह बिहार की सबसे बड़ी कोचिंग अर्थव्यवस्था का केंद्र भी है। यहां हर वर्ष लाखों छात्र आते हैं। हॉस्टल, मेस, किताबें, टेस्ट सीरीज, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोचिंग संस्थानों का पूरा कारोबार करोड़ों रुपये का है।
ऐसे में जो संस्थान सबसे ज्यादा छात्रों को आकर्षित करता है, वह केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक शक्ति भी बन जाता है।
खान सर का मॉडल पारंपरिक कोचिंग व्यवस्था से अलग रहा है। कम फीस, सोशल मीडिया की जबरदस्त पहुंच, यूट्यूब के माध्यम से व्यापक लोकप्रियता और छात्रों के बीच सीधा संवाद — इन सबने उन्हें शिक्षक से कहीं बढ़कर एक सार्वजनिक व्यक्तित्व बना दिया है।
यही कारण है कि जब उनके संस्थान के बाहर गोली चलती है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति या एक कोचिंग पर हमला नहीं माना जाता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़ा करता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बिहार का युवा पहले से ही प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, भर्ती विवादों और बेरोजगारी की मार झेल रहा है। ऐसे माहौल में अगर शिक्षा के केंद्र भी असुरक्षित दिखने लगें तो युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
पुलिस जांच कर रही है और उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द सच्चाई सामने आएगी। लेकिन एक बात तय है — 2019 की बमबारी और 2026 की फायरिंग को साथ रखकर देखें तो यह सवाल अब पहले से ज्यादा बड़ा हो गया है कि आखिर पटना के कोचिंग हब में बार-बार हिंसा की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं?
अगर शिक्षा के मंदिरों के बाहर गोलियां और बम चर्चा का विषय बनने लगें, तो यह सिर्फ अपराध की खबर नहीं रहती, बल्कि समाज के भविष्य को लेकर चिंता का विषय बन जाती है।
