हिन्दू/सनातन धर्म में इतने देवी देवता क्यों ? और कैसे चुना जाए अपना इष्ट ? अश्ली भगवान् कौन है ?हिन्दू/सनातन धर्म में इतने देवी देवता क्यों ? और कैसे चुना जाए अपना इष्ट ? अश्ली भगवान् कौन है ?

अक्सर आपको अपने धर्म से विमुख करनेवाले लोग आपसे ये सवाल पूछते नजर आ जायेंगे की आपका अशली भगवान् कौन है ? या फिर सुप्रीम पॉवर कौन हैं ?

कोई कहेगा महादेव कोई, कोई राम तो कोई विष्णु तो कोई ब्रह्मा कोई हनुमान तो कोई कुछ तो कोई कुछ, हद तो तब हुई जब लोग ॐ को योग से अलग ले जाकर महादेव का इष्ट बताने लगे,
वास्तव में ये सभी जबाब गलत है। हर व्यक्ति के लिए उसका भगवान् या फिर इष्ट देवता अलग अलग होता है। आप पूछेंगे कैसे तो आइये समझते हैं Dhirendra Krishna Shastri का नाम सूना है ? चलिए और सरल कर देते हैं Bageshwar Dham का नाम सूना है ? अरे वही जो आजकल न्यूज़ और मीडिया में छाए रहते हैं। आजकल उनका विरोध और समर्थन जारी है।
अब वो भगवान और इष्ट हनुमान जी को मानते है। उनके लिए वही उनके इष्ट हुए सिद्धि है या नही ये तो आपको तय करना है। मगर उस व्यक्ति की ख्याति यह बोल रहा है की हिन्दुस्तान बोल रहा है। सनातन धर्म के प्रति आस्था और धर्म को हर घर में पहुचाने का बीड़ा अब वही बिरला उठा सकता है जो पहलवान हो और पहलवान का इष्ट तो हनुमान ही होगा ना ! क्या समझे गुरु ? वो उनकी व्याख्या करेंगे उनकी महिमा गायंगे जो कदाचित अनुचित नही, जैसे सबसे बड़ा साहित्य पर ग्रन्थ किसने लिखा तो वो कृष्ण है। सबसे बड़े आशिक कौन हुए तो वो कृष्ण है। पुरषों में महा पुरुष कौन हुए तो वो भी कृष्ण है। लेकिन कृष्ण पहलवान नही थे और बहुत कुछ नही थे।
क्षमता की मै बात नही कर रहा मै चरित्र की बात कर रहा, गोवर्धन पर्वत जिसने उठा लिया हो उससे बड़ा क्षमतावान कौन हो सकता है ! मगर काफी सारे चरित्र जो कृष्ण के थे वो उभर के नही आये वास्तव में कृष्ण उसे लाना ही नही चाहते थे।
अब हम लिखने पढने का काम करते हैं इसलिए मेरे इष्ट कृष्ण ही होंगे, क्योंकि भगवद गीता से बड़ा कोई साहित्य भला कोई दूसरा हुआ है क्या  ? और साहित्य से हम जुड़े हैं इसलिए कृष्ण ही मेरे शार्थी है कोई और नही।
आइये इसको ऐसे समझते हैं बाप तो एक ही होगा ना ! इसका मतलब क्या है ? चाचू और मामू की इज्जत हम नहीं  करेंगे ? बिलकुल करेंगे , मगर फर्क तो होगा ही, इसलिए लिखने पढने वाले लोग कृष्ण को चुन ले तो उनका मार्ग आसान हो जाता है। विचार तो सबके पास है पर कागज पर उताड़ने के लिए कृष्ण ही काम आयेंगे। सब्द नहीं वो सब्दावाली है।
                                                                                               बहरहाल अपना इष्ट देव आप अपने कामानुसार ही चुने, तभी सफल हो पायेंगे पैदा करने वाले बाप को आप नही चुन सकते, मगर अपने कर्म के बाप को तो चुन ही सकते हैं, तो आपकी रूचि किस्मे है ? धंधा व्यवसाय या फिर राजनीति ? अलग अलग हो सकता है !
भगत पहलवान तो भगवान् हनुमान, भक्त पत्रकार तो भगवान् वासुदेव, इसी तरीके से सबको अपना पाना इष्ट चुनने की आजादी हमारा धर्म देता है।
गावं में सूना होगा इष्ट देवता के बारे में, मगर वो सिर्फ दकिया नुशी विचार है। अश्ल में आपका इष्ट आपका कर्म तय करता है। जैसा कर्म वैसा ही इष्ट।
अक्र्मियो के इष्ट रावण, कर्ण और दुर्योधन जैसे लोग हो सकते हैं फिर क्या होगा ? आप उन्ही को प्राप्त होंगे फिर क्या होगा ? फिर जब आप उनको प्राप्त होंगे तब वो आपको तेल की कराही में तलेगा और आप नर्क को प्राप्त होंगे राक्षसों की पूजा करने वाला भी नर्क को ही  प्राप्त होता है।
पाप और पुन्य कुछ भी नही लेकिन जब आप गलत इष्ट का चुनाव करते हैं तभी आप नर्क में जाते हैं। जो जिसको चुनेगा वो उसी को प्राप्त होगा. हिन्दू हिंदुत्व और हमोलोगो को इष्ट बड़े ध्यान से चुनना चाहिये,
सवाल यह भी है की, कुछ लोग पूछ रहें हमसे आजकल, की आप धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का विरोध करते हैं या समर्थन ? तो मेरा जबाब उन सभी लोगो के लिए है, की समर्थन का तो पता नही लेकिन विरोध कदापि नही, क्योंकि एक व्यक्ति सामाजिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा हो गरीबो के लिए होस्पिटल बनवा रहा हो उसका क्यों ही विरोध होना चाहिए ?
जादूगर है फिर भी कबूल, नही है फिर भी कबूल है, किसी व्यक्ति से आप सहमत ना हो इसका मतलब यह नही की आप उसकी हड्डी तोड़ दे।
ठीक है वो पसंद नही आप उसके पास मत जाइए। मगर लालू के लाल और तमाम वैसे व्यक्ति जो धीरेन्द्र कृष्ण शाश्त्री को कटघरे में खड़ा करता है वो महा मुर्ख है। वास्तव में वो अज्ञानी है, पैसा माँगा है जी तुमसे ? की तुमको पटक के मारा है ? या फिर तुम समाज की ठिक्दारी ले लिए हो ? ऐसे ही लोगो के अंग विशेष पर लात मारकर भगा देना चाहिए। विरोध है दर्ज करवाइए घर में रहिये अपना काम कीजिये।
मगर नही हम तो भगवान् है, मुर्ख, अभी भगवान् है क्या इ तुमको पता है ? फिर भूतनी के भगवान बनते हो ये चाचा Lalu Prasad Yadav कुछ समझाइये बेटवा को Tejashwi Yadav को ज्ञान है इसलिए वो मौन है।
Tej Pratap Yadav अज्ञानी है इसलिए वो वाचाल है। इसमें गलती किसी की नही है। सब कृष्ण की गलती है थोडा सद्बुधी दीजिये भक्त को नही तो इ लालू के सत्ता को चकनाचूर करेगा पगला है अज्ञानता में धर्म को अधर्म में तब्दील करेगा, अहम ब्रह्मास्मि का मतलब क्या है ? मै ही भगवान् हु उसका शाब्दिक अर्थ अबोध को जब बोध होता है तो बुध की और जाता है और फिर परमात्मा में विलीन हो जाता है यही है मोक्ष।
भगवान् पृथ्वी पर नही होते ना आकास में रहते हैं वो तो आप ही है। मगर जब तक बोध नही तब तक आप भगवान् नही और जब भगवान् हो जायेंगे तब कहेंगे नही।
यही ज्ञान है क्या समझे गुरु ? कुछ समझ में नही आएगा ये दिव्य है  थोडा वक्त लगेगा बहरहाल तो आपसे जब भी कोई पूछे की आपका सुपर भगवान् कौन हैं तो कर्म अनुसार सोचकर बता दे और अभी तक सोच ही नही पाएं है ? की करना क्या है ? फिर ये मेरा लेख दिखा दे, समझदार होगा तो समझेगा, नही तो आजकल संतो को गाली देने की जो परम्परा विकसित हो रही है ना ! और ज्ञानियों को गाली देने की जो परम्परा विकसित हो रही है वो सबको नाश में मिला देगी इलसिए थोडा संभल कर बोलिए और बोलने से पहले सोच लीजिये की क्या बोल रहें है और समझ में ना आये तो चुप ही रहिये।
यधपि मुझे धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की कोई जरूरत नही क्योंकि मेरे पास कृष्ण और जब कृष्ण है तो कर्म है.
राधे राधे
#shubhendukecomments

By Shubhendu Prakash

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