ham hi na sab ko banaye hain palturamnitish kumar ka ulta byan

जो लोग कहते हैं हमने इसको बनाया उसको बनाया वास्तव में वो ये नहीं जानते की यही उनका अहंकार है। एक दिन उन्हें खा जाएगा ।

कोई किसी को नही बनाता न ही कोई किसी को चलाता है , Upendra Kushwaha को किसने बनाया ? RCP Singh को किसने बनाया ? जिसने जैसा कर्म किया वो वैसा बन गया ।
कृष्ण तो यही कहते हैं। चलाते भी सबको वही है फिर Nitish Kumar जी आपने कैसे बनाया किसी को ? बड़ा सवाल यह है कि बनाया भी तो स्वार्थ आपका था या नही ? फिर बनाया कैसे ? वास्तव में भाग्य विधाता बहुत दूर से तमाशा देख रहा है । होना तो सबका एक दिन हिसाब है जिंदगी कर्मो से लिखी किताब है । आपने किसी को किसी से मिलवा दिया फिर इस गुमान में जीते हैं की हमने फलाने से फलाना का संपर्क करवा दिया वास्तव में ये दुनिया है सब तय है जिसको जिससे जब भी प्रभु को मिलवाना होता है। उसे मिलवा ही देते हैं । सामने वाला जज करने लगे या फिर आपकी योग्यता पर प्रश्न चिन्ह लगाए मतलब उसकी मर्जी से मुलाकात तो हुई मगर उस मिलन का उसे मोल न हो और वो अपनी छाती चौड़ी करके कहता फिरे की हम तो फलना को बना दिए चिलना मेरे कारण ही है।
तो माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी आप अगर ऐसा सोचते है तो यहीं आपके घमंड का नतीजा है श्री जीतन राम मांझी ( Jitanram Manjhi ) को आप मुख्यमंत्री क्यों बनाए थे उसमें भी आपका स्वार्थ था। एक दिखावा था। की देखो हम लोकसभा चुनाव में हार गए हैं इसलिए हम नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद का त्याग करते हैं।
आपने सबसे निम्न दर्जे के व्यक्ति को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी क्योंकि आपको रिमोट से सरकार चलानी थी । मगर ऐसा हुआ नही , फिर क्या हुआ ये पूरा बिहार जानता है। फिर कुशवाहा वोट को साधने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को सामिल किया जिस व्यक्ति को घर से पहले बेघर किया बेज्जत किया हो सरेआम उसको साथ में लाने की क्या जरूरत पड़ गई ? मुझे नही मालूम बहरहाल एक आईएएस अफसर से आप प्रभावित है और उसे जदयू का अध्यक्ष तक बनाते हैं फिर ऐसा क्या हो गया की उसको भी बेज्जत कर दिए ? हम बताते हैं आपका घमंडी स्वभाव ।
मित्रो रावण याद है आपको वो भी बहुत कुछ बनाता था लेकिन उसको भी ये लगने लगा की मैं ही विधाता हू हर्ष आपको मालूम है अरे भाई शरीर आपका है ही नही , फिर घमंड और गुमान किस बात का की हमने उसको इसको बनाया है । माना की माना है खुदा हमने तुमको खुद ही खुद को खुदा न समझो । Lalu Prasad Yadav जी का पुराना भाषण जेहन में आ गया लोकसभा में बोले थे नीतीश के पेट में दांत है बहरहाल आज जदयू की हैसियत सबको पता है फिर भी किस नैतिक आधार पर कुर्सी से चिपके है श्री कुमार मुझे नही मालूम उनके और Tejashwi Yadav के बीच का डील वही जाने मगर बिहार की जनता सब देख रही है महोदय । फिर से पलटने का मौका शायद इस बार न मिले ! बहरहाल राजनीति है जनाब रणभूमि नही। यहां पर बातचीत हो रही है संवाद हो रहा है बातो का ज़बाब तो बात होता है जो लाठी उठा ले समझ लीजिए अधीर है और मूर्ख है हरे कृष्णा

By Shubhendu Prakash

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