सोशल मीडिया पर यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक अपना चेहरा दिखाने से बचता है, तो उससे भावनात्मक या निजी बातचीत आगे बढ़ाने से पहले **Live Video Call के माध्यम से उसकी पहचान का सत्यापन अवश्य करें।
** फोटो fake हो सकती है, कहानी fake हो सकती है और मोबाइल नंबर virtual भी हो सकता है।
कई मामलों में व्यक्ति अपनी पहचान, उम्र, लिंग, देश या सामाजिक पृष्ठभूमि के बारे में भी गलत जानकारी देकर एक पूरी तरह realistic माहौल तैयार कर सकता है। धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान का इस्तेमाल भी कभी-कभी भरोसा बनाने के लिए किया जा सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और dating platforms पर ऐसे अनेक मामलों के अध्ययन में यह सामने आया है कि पहचान सत्यापित किए बिना बढ़ाया गया भावनात्मक या निजी संपर्क व्यक्ति की **privacy, emotions और financial security**—तीनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इसलिए चाहे सामने **लड़का हो या लड़की—पहचान पहले, विश्वास बाद में।** **एक Live Video Call कई महीनों के भ्रम से बचा सकती है।** **सूचना जनहित में जारी।**
