नई दिल्ली/डिजिटल डेस्क।
सिनेमा को एक नए नजरिए से देखने की कोशिश के साथ “मेरी नज़र से” नाम की नई डिजिटल सीरीज़ की शुरुआत की गई है। इस सीरीज़ को होस्ट कर रही हैं प्रीति शुक्ला, जो अपने पहले एपिसोड में मशहूर फिल्मकार Vishal Bhardwaj के सिनेमा और उनके निर्देशन की गहराई पर चर्चा करती नजर आती हैं।
प्रीति शुक्ला ने अपने परिचय में कहा कि यह सीरीज़ दर्शकों को “उनकी नजर से दुनिया देखने” का मौका देगी। पहले ही एपिसोड में उन्होंने विशाल भारद्वाज को चुना, जिनका सिनेमा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखता है। उन्होंने बताया कि विशाल भारद्वाज न केवल एक बेहतरीन निर्देशक हैं, बल्कि एक सशक्त संगीतकार और गायक भी हैं, जिनकी फिल्मों का संगीत भी उतना ही प्रभावशाली होता है जितना उनका निर्देशन।
शेक्सपीयर से प्रेरित सिनेमा की झलक
प्रीति शुक्ला ने अपने विश्लेषण में बताया कि विशाल भारद्वाज की कई फिल्में विश्व साहित्य, खासकर William Shakespeare के नाटकों से प्रेरित रही हैं।
- Maqbool – “Macbeth” पर आधारित
- Omkara – “Othello” पर आधारित
- Haider – “Hamlet” पर आधारित
इन फिल्मों के जरिए उन्होंने भारतीय परिवेश में शेक्सपीयर की कहानियों को एक नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया, जो दर्शकों को गहराई से जोड़ता है।
जटिल किरदार और भावनात्मक गहराई
प्रीति शुक्ला के अनुसार, विशाल भारद्वाज की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनके किरदार होते हैं। उनके पात्र सरल नहीं, बल्कि जटिल, रहस्यमयी और भावनात्मक स्तर पर गहरे होते हैं।
उदाहरण के तौर पर उन्होंने 7 Khoon Maaf की सुज़ाना, Haider की ग़ज़ाला और Maqbool की निम्मी जैसे किरदारों का जिक्र किया, जो प्रेम, अपराध, जुनून और मानसिक संघर्ष के कई स्तरों को दर्शाते हैं।
इन किरदारों के माध्यम से विशाल भारद्वाज न केवल व्यक्तिगत भावनाओं को दिखाते हैं, बल्कि समाज के बड़े सवालों—जैसे सत्ता, हिंसा, आतंकवाद और रिश्तों की उलझनों—को भी सामने लाते हैं।
महिला किरदारों की मजबूत प्रस्तुति
प्रीति शुक्ला ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विशाल भारद्वाज की फिल्मों में महिला पात्रों को कभी कमजोर नहीं दिखाया गया। भले ही उनका स्क्रीन टाइम कम हो, लेकिन उनका प्रभाव उतना ही गहरा होता है जितना पुरुष पात्रों का।
यह उनके सिनेमा की एक बड़ी ताकत मानी जाती है, जहां महिला किरदार भी कहानी को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सिनेमा जो सोचने पर मजबूर करता है
“मेरी नज़र से” सीरीज़ का पहला एपिसोड यह दर्शाता है कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विचार और संवेदना का माध्यम भी हो सकता है। प्रीति शुक्ला के मुताबिक, विशाल भारद्वाज की फिल्में दर्शकों को सिर्फ कहानी नहीं सुनातीं, बल्कि उन्हें सोचने पर मजबूर करती हैं।
सीरीज़ के इस पहले एपिसोड के जरिए यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले एपिसोड्स में भी दर्शकों को इसी तरह गहराई से सिनेमा और समाज को समझने का अवसर मिलेगा।
