भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों, टाटा, बिरला, रिलायंस, अडानी, आदि को अपना व्यवसायिक साम्राज्य खड़ा करने में दशकों लग गए थे। इन समूहों को अपनी सम्पत्ति को 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंचाने में लगभग 30 वर्षों का समय लगा था परंतु आज के युवावर्ग द्वारा स्थापित की जा रही कम्पनियों को अपनी सम्पत्ति को 100 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंचाने में केवल 1 से 3 वर्ष का समय लग रहा है। भारत में समय बहुत तेजी से बदल रहा है और भारतीय युवा आज भारत की तस्वीर बदलने को उतावाले होते दिखाई दे रहे हैं। जून 2026 में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स) का व्यवसाय करने वाली सर्वम कम्पनी ने अपनी स्थापना के केवल 3 वर्ष के अंदर ही 150 करोड़ (1.5 बिलियन) अमेरिकी डॉलर की सम्पत्ति खड़ी कर ली है। इसी प्रकार, आज जेप्टो एवं मेन्सा नामक ब्राण्ड कुछ ही महीनों में व्यवसाय के उस स्तर को प्राप्त कर लेते हैं, जिसे हासिल करने में पुरानी बड़ी कम्पनियों को कई दशक लग गए थे। आज के समय में टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में स्थापित हो रही कम्पनियों की तुलना यदि इसी क्षेत्र में लगभग 20/25 वर्ष पूर्व स्थापित कम्पनियों से भी की जाय तो सम्पत्ति खड़ी करने के समय में बहुत अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2000 में स्थापित कम्पनियों को यूनिकोन (100 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सम्पत्ति बनाना) बनने में लगभग 20 वर्ष से अधिक का समय लग रहा था, वहीं वर्ष 2020 में स्थापित कम्पनियों को यूनिकोन बनने में केवल एक वर्ष का समय लग रहा है। वित्तीय क्षेत्र में स्थापित की गई कम्पनियों को यूनिकोन बनने में 30 वर्ष का समय लगा है। वहीं मेन्सा ब्राण्ड जैसी कम्पनी को यूनिकोन बनने में केवल 6 माह का समय लगा है। बाजार वही है, परंतु समय तेजी से बदल रहा है। इस परिवर्तन में भारतीय युवाओं की प्रमुख भूमिका रही है। आज भारत में व्यावसायिक घराने/खानदान एवं अमीर लोग कहीं पीछे छूट गए हैं एवं युवा पीढ़ी तेजी से बिलिनायर की सूची में अपनी जगह बना रही है।

पिछले 5 वर्षों के दौरान भारत में एक लाख से अधिक नए स्टार्ट-अप स्थापित हुए हैं। आज भारत ने अपने आप को, अमेरिका एवं चीन के बाद, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्ट-अप इको सिस्टम में स्थापित कर लिया है। भारत में आज अधिक से अधिक लाभ अर्जित करने के उद्देश्य से उपभोक्ता उत्पादों को बढ़ावा देने वाले स्टार्ट अप बन रहे हैं। किराना उत्पादों से संबंधित ऐप अधिक संख्या में बनाए जा रहे हैं क्योंकि यूपीआई जैसा पेमेंट गेटवे पूर्व से ही उपलब्ध है और भुगतान प्रणाली को अलग से विकसित करने की आवश्यकता ही नहीं है। साथ ही, 140 करोड़ नागरिकों का बायोमेट्रिक डाटा पहिले से ही सत्यापित है और यह उपभोक्ता उत्पादों से सम्बंधित ऐप बनाने वाले इंजीनियरों को उपलब्ध भी है। भारत में डिजिटल लाकर में 750 करोड़ से अधिक दस्तावेज जमा हो चुके हैं। सस्ता इंटरनेट डाटा उपलब्ध है एवं 90 करोड़ से अधिक भारतीय इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। इन परिस्थितियों के बीच आज 20 वर्ष के युवा एंटरप्रेन्योर को व्यवसाय स्थापना के प्रथम दिवस से ही पूरा भारत उसके उत्पाद के बाजार के रूप में उपलब्ध है। उक्त कारकों के चलते ही वर्ष 2021 में भारत में 45 नए यूनिकोन विकसित हुए थे।

भारत के पास आज दुनिया के सबसे स्मार्ट एवं कुशल इंजीनीयर तो हैं परंतु हमारे पास अपने गूगल, अपना यू ट्यूब एवं अपना फेस बुक नहीं है। क्योंकि, भारत में उच्च स्तर का तकनीकी नवाचार नहीं हो पा रहा है जिससे उच्च तकनीकी के ऐप भारत में कम बन रहे हैं। हालांकि, विकसित देशों में जो भी उच्च स्तर के तकनीकी नवाचार हो रहे हैं इनमें भारतीय इंजिनीयरों की भी महती भूमिका रहती है। इसी कारण से भारतीय इंजीनियरों की विकसित देशों में भारी मांग है। भारतीय युवाओं को दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन करने के स्थान पर भारत में उच्च तकनीकी के नवाचार करने की ओर पूरा ध्यान देना चाहिए। अब तो विकसित देश भी यह मानने लगे हैं कि वर्तमान सदी केवल भारत की है। कई विकसित देशों सहित चीन में जनसंख्या वृद्धि दर अब ऋणात्मक हो चुकी है। साथ ही, इन देशों में वृद्ध नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पूरे विश्व में आज भारत एक युवा देश के रूप में उभर रहा है। अतः भारतीय युवाओं से न केवल भारत में आर्थिक विकास को गति देने बल्कि विश्व के अन्य कई देशों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की अपेक्षा की जा रही है। कई देशों ने तो अपनी संसद में प्रस्ताव पास करने के उपरांत भारत सरकार से भारतीय युवाओं को इन देशों में भेजने की मांग की है।

भारतीय युवा आज न केवल भारत में तेजी से यूनिकोन विकसित कर रहा है बल्कि आज भारतीय अन्य देशों में पहुंच कर अपने व्यापार का विस्तार भी कर रहे हैं, इसी कारण से आज प्रतिवर्ष भारत से लगभग 7 लाख नागरिक विभिन्न देशों में जाकर बस रहे हैं। श्री लक्ष्मी मित्तल ने ब्रिटेन में आरसेलोर स्टील कम्पनी खरीद ली है। यह कम्पनी पूर्व में बीमार कम्पनी की श्रेणी में शामिल थी परंतु मित्तल समूह ने इसे आज विश्व की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कम्पनी बना दिया है। इसी प्रकार वर्ष 2008 में टाटा समूह ने जैग्वार एवं लैंड रोवर कम्पनी को खरीद लिया था। भारतीय मूल के नागरिक आज ब्रिटेन में जायदाद निवेशकों के क्षेत्र में सबसे बड़े निवेशक माने जा रहे है। यूरोप में आज भारतीय कम्पनियां सबसे अधिक राशि का निवेश करती हुई दिखाई दे रही हैं और यूरोपीयन कम्पनियों का अधिग्रहण कर रही है। अमेरिका में भी लगभग यही स्थिति है। अमेरिका में सबसे बड़ी एल्यूमिनियम उत्पादक कम्पनी को भारतीय ने खरीद लिया है। इसी प्रकार, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, अडोबी जैसी बड़ी कम्पनियों को भारतीय मूल के नागरिक ही चला रहे हैं। भारतीय मूल के ही श्री अजय बांगा आज विश्व बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बन गए हैं। भारत में आज 15 लाख इंजिनीयर प्रतिवर्ष बन रहे हैं। विश्व के लगभग समस्त देशों को आज भारतीय युवाओं की अत्यधिक आवश्यकता है। विशेष रूप से जापान एवं यूरोपीयन देशों में प्रौढ़ नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चीन से आज कई देश दूर भाग रहे हैं क्योंकि चीन ने विभिन्न देशों को कर्ज दे रखा है, यदि कोई देश इस कर्ज का भुगतान समय पर नहीं कर पाता है तो चीन उस देश के संसाधनों पर अपना अधिकार जताने लगता है। इससे इन देशों के साथ चीन के सम्बंध अच्छे नहीं रहे हैं। दूसरी ओर भारत में राजनैतिक स्थिरता है, जिसके चलते आज भारत के विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बंध हैं। भारत आज विश्व के कई देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते सम्पन्न कर रहा है। आज स्थिति यह निर्मित हो रही है कि भारतीय यूनिकोन अमेरिकी कम्पनियों का अधिग्रहण करने की तैयारी कर रहे हैं। भारत आज जापान, इजराईल, रूस, यूएई एवं अमेरिका जैसे देशों का रणनीतिक साझीदार है। साथ ही, भारत के सम्बंध अब चीन के साथ भी सामान्य हो रहे है। भारत आज वैश्विक दक्षिणी क्षेत्र की आवाज बन रहा है क्योंकि विश्व के कई देशों का अब चीन पर भरोसा नहीं रहा है। भारत आज जी-20 देशों के समूह का भी सदस्य है, तो जी-7 देशों के समूह एवं वैश्विक दक्षिणी क्षेत्र के बीच एक पुल का काम करता हुए भी दिखाई दे रहा है। भारत एससीओ का भी सदस्य है तो ब्रिक्स का भी सदस्य है। साथ ही, भारत क्वाड का भी सदस्य है। इस प्रकार, भारत आज विश्व के लगभग समस्त महत्वपूर्ण समूहों का सदस्य है एवं भारत के विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ बहुत अच्छे, सौहार्दपूर्ण, व्यावसायिक एवं व्यावहारिक सम्बंध हैं। इसी कारण से ही कुशल भारतीय युवाओं की मांग आज पूरे विश्व में कई देशों द्वारा की जा रही है।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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