श्रीमद्भगवद्गीता — भगवानुवाच
श्लोक संख्या 16 | अध्याय 2 — सांख्य योग | श्लोक 24
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः॥
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—आत्मा को न काटा जा सकता है, न जलाया जा सकता है, न जल से भिगोया जा सकता है और न वायु से सुखाया जा सकता है। आत्मा नित्य, सर्वगत, स्थिर, अचल और सनातन है।
शरीर परिवर्तनशील है, लेकिन आत्मा भौतिक तत्वों से नष्ट नहीं होती।
शरीर बदलता है, आत्मा नहीं।
यह भगवान श्रीकृष्ण के उस ज्ञान का हिस्सा है जिसमें वे अर्जुन को आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझाते हैं।
✍️ शुभेन्दु प्रकाश
Platform: Aware News 24
Category/Column: धर्म का मर्म
Series: भगवानुवाच
राधे-राधे। 🌿🙏🏻
