बिहार में कैसे बिकता है शराब ? आखिर कितना हुआ विकाश ? बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य – आकलन

मुख्यमंत्री Nitish Kumar का रंग ढंग आजकल बदला बदला सा लग रहा है , कह रहे थे जो मन में आए पत्रकार बोल सकता है, सबको अपनी अपनी बात रखने का अधिकार है।

आए जी कुछ दिन पहले तो यही न कह रहे थे की अब हमको कोई पलटू राम नही कह सकता ! आजकल पत्रकारों से दोस्ती गांठते नजर आ रहे है। कह रहे है आप लोगो से हमारा रिश्ता बहुत पुराना है।
खैर छोड़िए ये सब बात। मुद्दे की बात पर आते हैं कह रहे थे बिजली दे दिए, बहुत काम किए हैं बिहार में, फिर ये #prashantkishor झूठे बोल रहे थे का ? बिजली आई है ठीक बात है पहले से बेहतर हुआ है ये भी ठीक बात है।
लेकिन दुरुस्त नहीं है बारिश होते ही कट 😁 । सूत्र तो ये भी बताते है , पता नहीं कितना झूठ और कितना सच ! इस बात की हम पुष्टि नहीं करते फिर भी लिख दे रहे हैं। जांच आप लोग कीजिएगा !
एक सूत्र ने बताया कि हर थाने का शराब का रेट तय है समस्तीपुर में बंगरा थाना सर्वाधिक 7 से 8 लाख रुपया थाने से जिला पुलिस मुख्यालय तक पहुँचता है। इसी तरह से हर थाने का रेट तय है। कुछ थानों में कम बिक्री है तो उसका रेट चार्ट अलग है ।
कुल मिलाकर एक जिला से लगभग 2 करोड़ की वसूली कम से कम 80 करोड़ रुपए की वसूली शराब से हर महीने पुरे बिहार से की जाती है। सब मिली भगत से होता है ! अब कितना पैसा जदयू फंड में गया या फिर ये एक मन गढंअंत कहानी है ! मुझे नहीं पता ! सूत्र से मैने उत्सुकता बस पूछ लिया:-
अच्छा ई बताओ इतने जो शराब माफिया पकड़े गए है वो कैसे हुआ ?
तो उसने बताया कि देखिए मान लिया जाए कोई शराब बेचता है। अचानक एक दिन उसका मन कर गया की हम आज से शरीफ बनेंगे नहीं बचेंगे शराब।
पुलिस को जाकर कहता है की साहेब अब चढ़ावा नही चढ़ेगा अब कमीशन नही देंगे क्योंकि हमने धंधा बंद कर दिया 😁 पुलिस वाला कहता है ठीक है जाओ ठीक से जियो कोई बढ़िया काम धंधा करो इसके बाद पुलिस क्या करती है ?
उसके पीछे दो मुखबिर लगा दिए जाते हैं । जैसे ही उसने बेचा शराब धर लिए जाते हैं बस बस हो गया काम तमाम । 😁😁
फिर शराब माफिया भी पकड़ लिया जाता है नोट:- ये कहानी मुझे मेरे सूत्रों ने आज से लगभग 6 महीने पहले सुनाई थी मैंने पूछा कोई सबूत है तो जबाब मिला नही फिर हम भी मटिया दिए लेकिन कल नीतीश कुमार जी ने हिम्मत बढ़ा दिया की जो मन में आए बोलिए तो हिम्मत करके बोल दिए । काम बहुत हुआ पिछले 2 दसक से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने हुए है।
लेकिन अभी तक इनके राज्य में स्कूल स्तर का दक्ष शिक्षक नही है। 😁 ये हाल है शिक्षा का नंबर 1।   स्वास्थ्य आप ही सोचिए हम कुछ नहीं कहेंगे एक बार अपने गांव का प्राथमिक उपचार केंद्र पर जाइए हाल चाल और दिमाग सब दुरुस्त हो जाएगा।
हम कुछ कह नहीं रहे हैं वैसे प्रशांत किशोर सब कह ही दीए है। ईमानदार नेता रोड पर। चलिए नाम ले लेते हैं Sudhakar Singh कृषि की बेजोर समझ है इनके पास पिछले दिनों इनका साक्षात्कार करने का मौका भी मिला , खुलकर बोले और खोलकर बताई हक्कित की बिहार में क्यों है इतनी बदहाली और कृषि को कैसे सुधारा जा सकता है लेकिन काम करनेवाले लोग कैबिनेट का हिस्सा नही है ये दुर्भाग्य है बिहार का
न न कोई पक्षपात नहीं और न कोई पुरानी जान पहचान है और न ही किसी तरह का लोभ लालच जो जैसा है वो वैसा है 😁 बहरहाल ये एक उदाहरण है जो मेरी नजर में हैं बाद बाकी कई उदहारण होंगे ! तो स्वास्थ्य कैसा है ? हम कुछ नही बोलेंगे 😭 कितना सुधार हुआ ? हम कुछ नही बोलेंगे 😭 शिक्षा खुद ही देख लीजिए दो दशक में इनके पास बिहारी शिक्षक नही हुआ ।
रोजगार 😁😁😁 मत पूछिए 😁😁 गर्दा ! नीति आयोग की रिपोर्ट देख लीजिए , बिजली मिला है और पहले से बेहतर है और करवाई भी त्वरित होती है अधिकारी सुनते है इसमें कोई शक नहीं है ।
माफिया राज का बिहार से सफाया हुआ है इसमें भी कोई शक नही है । पानी , पहुंचा है इसमें भी कोई शक नही लेकिन पटना के कौशल नगर में ही नल जल से अछूता मिला। (पिछले साल 2022 तक तो नल जल नहीं पंहुचा था अभी का पता नहीं)
कई सारे भ्रष्टाचार भी उजागर हुए मगर काम हुआ है। इसलिए हम कह सकते हैं की बिजली और पानी पर काम बिलकुल किया गया है। 🙏 और अपराधियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
आज बिहार माफिया मुक्त प्रदेश बन चुका है । छिट पुट घटनाएं होती रहती है उसपर कुछ कह नहीं सकते मगर संगठित अपराध 99% हम कह सकते हैं की कम हुए हैं । पुल पुलिए रोड आदि बने हैं । वही कुछ पुल धराशाई भी हुए हैं 😁 फिर भी ठीक है 🙏 इसको भी विकास हम कह सकते हैं ।
बाद बाकी शिक्षा है ?
नही 🤣
स्वास्थ्य बिलकुल नही
कृषि 😁😁😁 डमाडोल , कराह रहा है बस बस मारनेवाले हैं ।
शिक्षा जब है ही नही ठीक तो रोजगार का बात करना तो बैमानी ही न होगा जी 😁 बहरहाल ये विश्लेषण आपको कैसा लगा कॉमेंट बॉक्स में अपनी राय से अवगत करवाएं पिछले दिनों क्रिकेट खूब चला तो आज जो है सो 8 से लेकर 12 तारीख तक का खबर हम आपको सुनाएंगे
मिलते हैं वीडियो पर
।।राधे राधे ।।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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