वर्ण व्यवस्थावर्ण व्यवस्था

भगवद गीता में भी लिखा है , श्री भगवानुवाचः वर्ण व्यवस्था भगवान ने कर्मानुसार बनाई थी जो की मानवों ने इसे अपने फायदे के लिए जन्मानुसार कर लिया, ग्रंथ या धर्म गलत नही, पैदा हम भी हिंदू ही हुए थे मगर समाज की कुरीतियों ने और आज के ब्राह्मण नही यह रीत युगों युगों से चलती आ रही है। जिसे भगवान ने गलत कहा है। वर्ण व्यवस्था को खत्म कीजिए और उसे कर्म के अनुसार करे। राधे राधे

जब अर्जुन ने कहा कि मैं अगर कौरवों को मार दूंगा तो कुल की स्त्रियां दूषित हो जाएगी और वो किसी और से व्यहविचार करेगी उससे वर्ण शंकर उत्पन होंगे। तब कृष्ण ने व्यंग्यात्मक श्लोक कहा जो की कुछ इस प्रकार था की तू न तो ज्ञानियों की तरह बात कर रहा और पंडित की तरह बाते भी करते हो !

यहां पर कृष्ण ने ब्राह्मणों के ऊपर इस कुव्यवस्था के लिए व्यंग किया जो कुल और पूर्वजों की बाते करते हैं। अब ब्राह्मण के इस कटाक्ष पर किसी भी व्यक्ति ने ध्यान नहीं दिया। न ही हमने कृष्ण का ज्ञान ही लिया । लिया क्या तो अर्जुन की दुविधा और एक गलत सब्द, अपने फायदे के लिए चुन लिया और वो शब्द था “वर्णशंकर” कुछ लोग आज भी कुल की दुहाई देते हुए वर्णशंकर शब्द का इस्तेमाल करते है। जन्मानुसार वर्णव्यवस्था भी तो #nepotism या परिवार वाद है। या फिर भाई भतीजा वाद है।

इसे कब छोड़ेगा हिंदू समाज #कहब_त_लग_जाई_धक_से #kahab_ta_lag_jaaie_dhak_sae वर्ण शंकर सब्द ही गलत है। कुल का त्याग कर पाएगा हिंदू ? क्या किसी भी वर्ण में ब्याह रचा पाएगा हिंदू ? फिर काहे का हिंदुत्व और काहे का हिंदू ? सब झूठ है ढकोसला है ।

हम त्याग कर चुके अपने जेनरेशन से आप क्या त्याग कर पाएंगे ? अपनी बहन बेटियों या बेटो की शादी दूसरे वर्ण में कर पाएंगे ? अब भगवद गीता मुझे यही सिखाता है।

शायद समाज को अपने नियम कानून से अधिक भगवान की बात भी पसंद नही ! फिर काहे भगवान मानते हो ? सोचेगा सिर्फ समाज हम नहीं।

इसलिए जो भी कृष्ण के विचार से असहमत है या फिर कुछ ताली भी पीट देते हैं। जब इसी पर एक लड़का वीडियो में कहता है वर्ण व्यवस्था कर्मानुसार है ना की जन्म अनुसार। भैया ज्ञान की सिर्फ बात कीजिए समाज को इसमें अपना परिवारवाद टूटता नजर आता है।

इसलिए भगवान के कहे सब्दो को फेंक दो तो जो व्यक्ति इसे नही मानता वास्तव में ढोंगी वो है। अब दूसरे जात में ब्याह करना ठीक है मगर ब्याह के लिए धर्म बदलना गलत भी है। यहां पर फिर भगवद गीता का नियम लागू होता है परधर्मो भयावह। अब सोचिए क्या सही क्या गलत हम तो उसके दास है जो वो लिखवाता है बस लिख देता हु।

गाली भी अब उसके लिए और ताली भी अब उसके लिए लाइक और देखकर मुंह भी अब उसी से मोड़ भगवान चाहिए या सामाजिक नियम तय समाज को ही करना है हमने बस आइना ही तो दिखाया है

राधे राधे

#shubhendukecomments

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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