लेखक: शुभेन्दु प्रकाश
रविवार का दिन था।
सोचा थोड़ा लोगों से बातचीत हो जाए, चकल्लस हो जाए — मटरगस्ती, पान, घूमना-फिरना।
इसी दौरान दिमाग में एक सवाल लगातार घूमता रहा कि आजकल सोशल मीडिया पर आरक्षण को लेकर इतना हो-हल्ला क्यों है?
यूजीसी, नियम, नोटिफिकेशन — ये सब खबरें मैं वैसे भी नहीं देखता।
लेकिन कुछ दिन पहले न्यूज़ पिंज पर मुसहर समाज पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री देखी थी।
जो लोग उनके उत्थान के लिए काम कर रहे थे, उन्होंने एक बेहद सटीक सवाल उठाया था —
आजादी के इतने साल बाद भी आरक्षण आखिरकार भरा क्यों हुआ है?
100% आरक्षण दीजिए, लेकिन सवाल पूछने दीजिए
मैं साफ कहता हूँ —
मुझे 100% आरक्षण से कोई दिक्कत नहीं है।
मैं खुद स्वर्ण समाज से आता हूँ और खुलकर कहता हूँ, 100% दीजिए।
लेकिन सवाल यह है कि उसका लाभ किसे मिल रहा है?
-
चिराग पासवान आरक्षित सीट से ही चुनाव क्यों लड़ते हैं?
-
जीतन राम मांझी का बेटा आरक्षित सीट से ही क्यों आता है?
-
IAS अधिकारियों के बेटे-बेटियों को आरक्षण क्यों चाहिए?
यही लोग, यही नेता, अपने ही समाज के गरीब और पढ़े-लिखे लोगों को आगे क्यों नहीं बढ़ने देते?
गरीब वही रह गया, अमीर और अमीर हो गया
आज भी हकीकत यही है —
गरीब गरीब ही रह गया,
और जो एक बार ऊपर पहुंच गया, वो उसी आरक्षण का फायदा लेकर डायनेस्टी खड़ी कर रहा है।
चिराग पासवान हों या जीतन राम मांझी —
उन्होंने अपने समाज के लिए वास्तव में क्या किया, यह सवाल पूछना अपराध नहीं है।
समाधान क्या है?
समाधान बहुत साफ है:
-
हर स्तर पर आरक्षण लागू कीजिए — लोकसभा, राज्यसभा, हर जगह
-
क्रीमी लेयर लागू कीजिए
-
असली गरीब तक लाभ पहुंचाइए
छुआछूत की बात करते हैं लोग —
अरे भाई, वो अवेयरनेस का मुद्दा है।
हम तो मुसहर टोले में भी खाना खा लेंगे,
डोम के घर भी बैठ जाएंगे।
ऐसे लोग समाज में आज भी बहुत हैं।
हरिजन कौन है?
गांधी जी ने “हरिजन” शब्द दिया।
लेकिन आज हरिजन कौन है?
क्या चिराग पासवान हरिजन हैं?
क्या उनके समाज के गरीब, पढ़े-लिखे युवक को लोकसभा भेजने की कोई कोशिश हुई?
या फिर वही टिकट, मोटे पैसे लेकर, तयशुदा चेहरों को दे दिया जाता है?
आरक्षण नहीं, तमाशा बन गया है
आरक्षण के नाम पर आज तमाशा चल रहा है।
-
सरकार जनता से टैक्स लेती है
-
फिर उसी पैसे को “भीख” की तरह वापस बांटती है
-
अमीर भी योजना का पैसा उठा लेता है
-
गरीब वहीं का वहीं रह जाता है
PM आवास, शौचालय, सब्सिडी —
जमीन पर जाकर देखिए, किसे मिला और कैसे मिला।
आरक्षण का अंत कब?
साफ बात है —
जब तक समाज के आख़िरी पायदान पर खड़ा व्यक्ति मजबूत नहीं होगा,
तब तक आरक्षण की जरूरत रहेगी।
लेकिन आज आरक्षण को खत्म करने के बजाय
राजनीतिक हथियार बना दिया गया है।
यह एक षड्यंत्र है —
गरीब को गरीब बनाए रखने का।
अंत में
आज भी जो असहाय है,
जो कमजोर है,
जो संसाधनों से दूर है —
उसे आरक्षण चाहिए।
लेकिन सही हाथ में, सही तरीके से।
रविवार मनाइए, खुश रहिए, जवान रहिए —
और गरीबों के लिए मन में श्रद्धा, प्रेम और करुणा रखिए।
राधे राधे।
📌 Disclaimer:
इस वीडियो का उद्देश्य किसी प्लेटफॉर्म, समुदाय या व्यक्ति को बदनाम करना नहीं है।
यह केवल सामाजिक जागरूकता और विचार-विमर्श के लिए है।
अगर आप भी मानते हैं कि आरक्षण का लाभ सही हाथ तक पहुँचना चाहिए —
तो वीडियो को अंत तक देखें, अपनी राय कमेंट में लिखें और चर्चा का हिस्सा बनें।
राधे राधे।
#100PercentReservation #socialjustice #castepolitics #groundreality #OpinionJournalism #indiansociety #awarenews24 #freedomofexpression #ShubhenduPrakash
