#arvindkejriwal #delhiexcisepolicycase #courtverdict दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए. फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पूरा का पूरा फर्जी केस बनाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मिलकर आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा, ताकि आम आदमी पार्टी को खत्म किया जा सके.
केजरीवाल ने कहा कि यह पूरा मामला फर्जी था और उनकी छवि खराब करने के लिए उनके ऊपर कीचड़ उछाला गया. उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर लगातार उन्हें भ्रष्ट बताया गया.
प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए देश और संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर सत्ता चाहिए तो अच्छे काम करके हासिल कीजिए. देश में महंगाई, बेरोजगारी, टूटी सड़कें और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं हैं, जिनका समाधान किया जाना चाहिए.
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक
उन्होंने कहा कि विपक्ष के खिलाफ झूठे केस करना और उन्हें जेल में डालना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता. देश तभी आगे बढ़ेगा जब जनता की समस्याओं का समाधान किया जाएगा. केजरीवाल ने इसे सत्य की जीत बताया और कहा कि संविधान, जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने देश को दिया, उसकी भावना अंततः विजयी होती है.
सुनीता केजरीवाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पूरा जीवन ईमानदारी से जिया है और उनका एक ही ध्येय रहा है कि देश तरक्की करे. लेकिन सत्ता के लालच में पिछले कई वर्षों से हमारे ऊपर झूठे आरोप लगाए गए. हमें परेशान किया गया, अरविंद जी और उनके साथियों को जेल भेजा गया और बहुत कष्ट दिया गया. मुझे हमेशा विश्वास था कि ईश्वर हमारा साथ देंगे. आज आप ही बताइए कि भ्रष्टाचार किसका था – हमारा या सत्ता के लालच का?
सौरभ भारद्वाज ने भारत में सबसे बड़ी समस्या के तौर पर भ्रष्टाचार को चिन्हित किया. उनका कहना है कि आम जनता की धारणा यह है कि ज्यादातर राजनीतिक नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. इसके साथ ही आईएएस, आईपीएस जैसे महत्वपूर्ण अधिकारी भी अक्सर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहते हैं। पैसों के लेन-देन की बातें खुलेआम समाज में चर्चा का विषय बन जाती हैं.
भारद्वाज ने कहा कि ऐसे माहौल में ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों के साथ भी अन्याय होता है. दुर्गा शक्ति नागपाल और अशोक खेमका जैसे ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया गया. इसी तरह हाई कोर्ट के जज मुरलीधर को एक फैसले के बाद रातों रात तबादला कर दिया गया, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है.
उन्होंने अरविंद केजरीवाल का उदाहरण देते हुए बताया कि वे एक आईआरएस अधिकारी और आईआईटी के विद्यार्थी रह चुके हैं, जिन्होंने नौकरी छोड़कर जनता की सेवा का मार्ग चुना. लेकिन 10 साल मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उन पर भ्रष्टाचार का ठप्पा लगाया गया और छह महीने जेल में रखा गया. साथ ही उनकी चिकित्सा सुविधा में भी बाधाएं डाली गईं और सार्वजनिक अपमान झेलना पड़ा.
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के संदिग्ध मामलों में अक्सर सीबीआई, ईडी जैसे एजेंसियां राजनीति के दबाव में आकर चुनिंदा कार्रवाई करती हैं. उन्होंने कहा कि पीएमएलए के तहत मामलों में जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है और कई बार बिना तर्कसंगत अदालतीन निर्णय के लिए लोग वर्षों जेल में बंद रहते हैं. यदि मूल भ्रष्टाचार का केस अदालत में गिर जाता है तो पीएमएलए का पक्ष कैसे टिक सकता है, यह सवाल भी उन्होंने उठाया.
अदालत से शराब नीति मामले में बड़ी राहत
इस मामले में सबसे पहले अदालत ने आबकारी विभाग के पूर्व कमिश्नर कुलदीप सिंह को बरी किया. इसके बाद मनीष सिसोदिया और अंत में अरविंद केजरीवाल को भी आरोपों से मुक्त कर दिया. कोर्ट ने टिप्पणी की कि सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कई खामियां थीं और उसमें कई ऐसे सवाल थे जिनका संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया. जांच एजेंसी के सबूत कमजोर और अपर्याप्त पाए गए, इसलिए राहत दी गई.
कोर्ट ने कहा कि जब किसी संवैधानिक पद या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाये जाते हैं, तो उनके समर्थन में ठोस सबूत होना अनिवार्य है. केवल आरोप लगाने भर से मामला नहीं बन सकता.
हालांकि, जांच एजेंसी सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट है और उन्होंने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देने का इशारा किया है. सीबीआई के वकील आदेश का विस्तृत अध्ययन कर अपील दायर करेंगे.
एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा था, जिस आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज किया था. बाद में ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में भी मामला दर्ज किया गया था. इस केस में कई आम आदमी पार्टी के नेताओं को जेल जाना पड़ा और जमानत भी कई बार खारिज हुई.
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे पार्टी पर लगे कई कानूनी दबावों से उन्हें मुक्ति मिली है.
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