जलवायु परिवर्तन या, अंग्रेजी में आजकल पॉपुलर हो रहा शब्द क्लाइमेट चेंज दुनिया की कई प्रजातियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। वैज्ञानिकों ने इसके बारे में चिंता जाहिर की है और कहा है कि रेंगने वाले जीवों की कई प्रजातियां बढ़ते तापमान के कारण विलुप्त हो सकती हैं। इसके पीछे की वजह भी बहुत अलग है। जीव-जंतुओं पर अध्य्यन करने वाले वैज्ञानिक कह रहे हैं कि बढ़ते तापमान के कारण रेंगने वाले जीवों का लिंग परिवर्तन हो रहा है। यह परिवर्तन व्यस्क जीवों में नहीं बल्कि भ्रूण स्तर पर हो रहा है। आइए आपको बताते हैं कि वैज्ञानिक इस बात को लेकर क्यों चिंता में हैं। 

क्लाइमेट चेंज के कारण मौसमी गतिविधियों में बड़ा बदलाव अब आए दिन त्रासदी की खबर लेकर आ रहा है। पिछले कुछ सालों में जलवायु में जबरदस्त बदलाव देखा जा रहा है जिसके कारण मौसम चक्र बदलने लगे हैं। बेमौसम बारिश, बाढ़, बवंडर, भूस्खलन जैसी गतिविधियां भयावह रूप ले रही हैं। लेकिन बात सिर्फ मौसम तक ही सीमित नहीं रह गई है। दुनिया की कई प्रजातियों पर भी इसका खतरा मंडराने लगा है। रेंगने वाले जीवों की प्रजातियां, जिनमें सांप, छिपकली, मगरमच्छ जैसे जीव शामिल हैं, बढ़ते तापमान से बहुत प्रभावित होती हैं। हाल ही में सामने आया कि आस्ट्रेलिया की एक ड्रैगन छिपकली में नर छिपकलियों की संख्या तेजी से कम होने लगी, जबकि मादा छिपकलियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। इसके पीछे की वजह ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। 

इसके बारे में जब ध्यान दिया गया तो पता चला कि बढ़ता तापमान छिपकलियों का लिंग निर्धारण भी कर रहा है। यानि कि जब भ्रूण बनने का शुरुआती दौर चल रहा होता है तो भ्रूण विकास के लिए एक उपयुक्त तापमान से ज्यादा हो जाने पर उसका लिंग बदल जाता है। इसे टेम्परेचर डिपेंडेंट सेक्स डिटरमिनेशन कहते हैं। संक्षिप्त में इसे टीएसडी कहा जाता है। इस तथ्य के सामने आने के बाद ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ कैनबेरा में हुई स्टडी पर वैज्ञानिकों का ध्यान गया। इस स्टडी में ये बात पहले ही साबित कर दी गई थी कि वातावरण का बढ़ता तापमान छिपकलियों के लिंग निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है। 

डार्टमाउथ अंडरग्रेजुएट जर्नल ऑफ साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ कैनबेरा ने इस स्टडी को 2015 में कंडक्ट किया था। स्टडी के दौरान 130 ड्रैगन छिपकलियों के जीनोम पर अध्य्यन किया गया। फीमेल छिपकली में ZW सेक्स क्रोमोजोम होते हैं और मेल छिपकली में ZZ क्रोमोजोम होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर अंडों को उपयुक्त तापमान से ज्यादा गर्मी मिली तो मेल ड्रैगन के क्रोमोजोम होने के बावजूद भी भ्रूण मादा ही बना। यानि कि मेल क्रोमोजोम होने के बावजूद भी फिमेल जेंडर वाले बच्चे पैदा हुए। उसके बाद इस बारे में कई अध्य्यन किए गए और यह साफ हो गया कि बढ़ता तापमान रेंगने वाले जीवों के लिंग को बदल सकता है। ऐसे में इस बात का खतरा बढ़ जाता है कि अगर धरती का तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा तो इस तरह की प्रजातियां एक दिन विलुप्त भी हो सकती हैं।

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