लेखक: शुभेन्दु प्रकाश | Aware News 24
कल मेरी बात मेरी बुआ से हो रही थी।
घर की सबसे बड़ी बेटी — शांति ओझा।
बहुत भावुक होकर उन्होंने परिवार का हाल-चाल लिया। ज़्यादा कुछ लिखूँगा नहीं कि क्या-क्या बात हुई, मगर इतना ज़रूर लिखूँगा कि उनके रुँधे हुए गले से निकले शब्द आज भी कानों में गूंज रहे हैं—
“हम लोग बड़े गरीब परिवार से आते हैं…
ज्ञान भ गेलों है, अच्छा करब।”
जब बुआ बोलती हैं, मेरे होंठ अपने आप सिल जाते हैं।
पूछना तो यह भी था कि उनकी तबीयत कैसी है, रिचा ओझा दी के हसबैंड विवेक बाबू का क्या हाल है—
मगर उनकी आवाज़ में जो लड़खड़ाहट थी, उसने भीतर तक भावुक कर दिया। कुछ कह नहीं पाया।
बुज़ुर्गों के सामने न जाने क्यों शब्द कम पड़ जाते हैं।
बस सुनने का मन करता है—
क्योंकि उनका अनुभव हमसे चालीस साल ज़्यादा का होता है।
ज़्यादा कुछ नहीं लिखूँगा,
बस इतना कहूँगा—
अगर आप गरीबी में पैदा हुए हैं,
तो शांति बुआ से सीखिए कि इतिहास कैसे रचा जाता है।
एक पति के देहांत के बाद भी उन्होंने ज़िद नहीं छोड़ी।
मेरे बाबा स्व. रमाकांत सिंह (स्वतंत्रता सेनानी) की परख गलत नहीं थी—
उन्होंने सही चुनाव किया था दीनानाथ पांडे का।
मगर दुर्भाग्य ने घेर लिया, छात्र आंदोलन में उनकी मृत्यु हो गई।
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ।
बुआ ने कदम-कदम पर लड़ते हुए बिहार की एजुकेशन डायरेक्टर तक का मुकाम हासिल किया।
महिला उत्थान के लिए “जागो बहन” जैसे संस्थान की नींव रखी।
मेरे प्रति वे सख्त थीं—
आज समझ आता है, वह सख्ती नहीं थी, वह प्रेम था।
मोह और प्रेम में फर्क होता है।
प्रेम आपको गलत रास्ते पर जाने से रोकता है,
और मोह में इंसान कुछ भी कर बैठता है।
यह विषय अलग है, मगर शहीद दीनानाथ पांडे की पुत्री—
मेरी माँ समान बहन का आकस्मिक निधन आज भी दिल पर घाव की तरह है।
बेबी दीदी आज नहीं हैं,
मगर उनकी स्मृतियाँ आज भी दिल में ज़िंदा हैं।
गरीबी में जन्म लेना आपको तोड़ने के लिए नहीं,
आपको गढ़ने के लिए होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इतिहास रचा है—
इससे मैं इनकार नहीं करता।
मैं उनका आलोचक हूँ, विरोधी नहीं।
व्यक्ति से प्रेम है, विचार अपनी जगह।
अगर आप अमीर परिवार में पैदा हुए हैं,
तो धीरूभाई जैसा नाम बनाना आसान नहीं।
मुकेश अंबानी एक विरासत संभाल रहे हैं।
बड़े लोगों की आलोचना कीजिए—
गलत कर्म पर,
मगर साथ-साथ यह भी देखिए कि आप खुद क्या विरासत बना रहे हैं।
शांति बुआ का सानिध्य आज भी मुझे मिलता है।
ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे स्वस्थ रहें।
अंत में बस इतना—
गरीबी से शर्माइए मत।
गरीबी से सीखिए।
क्योंकि अक्सर इतिहास वहीं से लिखा जाता है,
जहाँ से उम्मीद सबसे कम होती है।
सब कुछ… राधे राधे।
