आज हम एक ऐसे दौर में खड़े हैं जहाँ तकनीक तेज़ है, मगर विवेक पीछे छूटता जा रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारे जीवन को आसान बनाया है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन जब यही AI अभिव्यक्ति की आज़ादी का निर्णायक बनने लगे, तब यह सुविधा नहीं बल्कि खतरे की घंटी बन जाती है।

यह सिर्फ़ “accountability” या “policy enforcement” का सवाल नहीं है।
यह मानव अधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय अभिव्यक्ति की सुरक्षा का प्रश्न है।


भावना कोई डेटा नहीं है

AI शब्द पहचान सकता है,
पैटर्न पकड़ सकता है,
यहाँ तक कि sentiment का अनुमान भी लगा सकता है।

लेकिन भावना (Emotion) इन सबसे कहीं आगे की चीज़ है।
भावना = अनुभव + संदर्भ + क्षणिक मनःस्थिति।

जब कोई व्यक्ति लिखता या बोलता है,
तो उसका भाव बदल सकता है —
व्यंग्य हो सकता है,
पीड़ा हो सकती है,
आक्रोश, प्रेम, तंज — सब एक साथ मौजूद हो सकते हैं।

AI के लिए यह सब अक्सर
“uncertain”, “risky” या “ambiguous” हो जाता है।

और सेंसरशिप की भाषा में एक खतरनाक नियम चलता है:
ambiguity = punishment

यही सबसे बड़ा खतरा है।


AI द्वारा सेंसरशिप: लोकतंत्र का शॉर्टकट

सेंसरशिप कभी सिर्फ़ शब्द देखकर नहीं होती।
वह हमेशा तीन चीज़ों को देखती है:

  • संदर्भ (Context)

  • नीयत (Intent)

  • सामाजिक प्रभाव (Impact)

AI इन तीनों को पूरी तरह नहीं समझ सकता

AI से सेंसरशिप कराना वैसा ही है जैसे
न्यायालय में जज की जगह स्पेल-चेक बैठा देना।

यह efficiency नहीं है,
यह संवैधानिक लापरवाही है।


यह भविष्य की समस्या नहीं, आज का संकट है

यह कहना कि “AI आगे चलकर सुधर जाएगा” —
एक खतरनाक तसल्ली है।

सच्चाई यह है:

  • AI अभी इंसान नहीं है

  • और शायद कभी होगा भी नहीं

फिर भी वही तय कर रहा है:

  • क्या बोला जा सकता है

  • क्या हटेगा

  • किसे चुप कराया जाएगा

यह प्रयोग हो रहा है:

  • यूज़र की सहमति (consent) के बिना

  • स्पष्ट जवाबदेही (accountability) के बिना

  • और सुधार से पहले सज़ा (punishment) के साथ

यह स्थिति alarmingly dangerous है।


मैन्युअल समीक्षा क्यों अनिवार्य है

जब तक AI:

  • भावनात्मक साक्षरता नहीं समझता

  • सांस्कृतिक संदर्भ नहीं पकड़ता

  • भाषा के व्यंग्य और मुहावरों को नहीं पहचानता

तब तक AI को निर्णायक नहीं,
केवल सहायक (assistant) होना चाहिए।

सही मॉडल साफ़ है:

  • AI = Alert System

  • Human = Final Decision

इसके बिना:

  • हर गलत टेकडाउन

  • हर थकी हुई रात

  • हर दबाई गई आवाज़

प्लेटफ़ॉर्म की नैतिक विफलता कहलाएगी।


यह सिर्फ़ कंटेंट क्रिएटर्स का मुद्दा नहीं

आज क्रिएटर परेशान है।
कल:

  • पत्रकार

  • लेखक

  • सामाजिक कार्यकर्ता

  • और आम नागरिक

सबकी आवाज़
एल्गोरिदम के मूड पर निर्भर होगी।

और तब सवाल यह नहीं रहेगा कि
“मेरी पोस्ट क्यों हटाई गई?”

बल्कि सवाल होगा:
“क्या सच बोलना सुरक्षित है?”

यही सबसे खतरनाक मोड़ है।


निष्कर्ष

AI सेंसरशिप नहीं कर सकता —
क्योंकि अभिव्यक्ति मशीन की नहीं, इंसान की चीज़ है

जब तक AI इंसान नहीं बनता
(और शायद कभी न बने),
मानव अभिव्यक्ति पर अंतिम अधिकार
केवल मनुष्य के पास ही होना चाहिए।

यह कोई rant नहीं है।
यह किसी कंपनी या तकनीक के खिलाफ़ नफ़रत भी नहीं है।

यह समय से पहले दी गई चेतावनी है —
ताकि कल बहुत देर न हो जाए।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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