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श्रीमद्भगवद गीता से भगवान के द्वारा कहे गए श्लोकों के संग्रह में आपका स्वागत है।
यह भगवानुवाच का 4th श्लोक (अध्याय 2, श्लोक 12) है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मा के शाश्वत स्वरूप के बारे में बताते हैं।
“न त्वेवाहं जातु नासं…” —
भगवान कहते हैं कि न कभी मैं नहीं था, न तुम नहीं थे, और न ही ये सभी राजा; और आगे भी हम सब कभी नष्ट नहीं होंगे।
👉 इस श्लोक का मुख्य संदेश:
आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है — वह सनातन है।
इस वीडियो में हम समझेंगे:
• 4th Bhagwanuvach Shloka का अर्थ
• आत्मा की अमरता का सिद्धांत
• कृष्ण का अर्जुन को दिया गया ज्ञान
• जीवन में इसका क्या महत्व है
📿 यह एक श्रृंखला (Series) है जिसमें हम
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कहे गए सभी श्लोकों का संग्रह और सरल व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं।
