Meta AI Drinking Bhains Ka Doodh? | AI Censorship & Freedom of Speech Under Threat | Aware News 24

लेखक: शुभेन्दु प्रकाश | Aware News 24

नमस्कार साथियों,

मैं शुभेन्दु प्रकाश। यह लेख किसी स्क्रिप्ट, अफ़वाह या सुनी‑सुनाई बात पर नहीं, बल्कि मेरे अपने डिजिटल अनुभव पर आधारित है। बीते कुछ समय से मैं जिस समस्या से जूझ रहा हूँ, वह केवल मेरी नहीं है—यह आज के डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की आज़ादी और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेंसरशिप के टकराव की कहानी है।

यह बात साफ़ कर दूँ कि यह लेख किसी प्लेटफ़ॉर्म को बदनाम करने के इरादे से नहीं लिखा गया है। उद्देश्य केवल जागरूकता है—ताकि भविष्य में कोई भी यूज़र ऐसी स्थिति का शिकार न हो।


जब AI इंसान की आवाज़ नहीं समझ पाता

आज सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर कंटेंट का पहला जज इंसान नहीं, बल्कि AI है। समस्या यहीं से शुरू होती है। AI न तो तंज समझता है, न व्यंग्य, न भावना, और न ही संदर्भ

मेरे मामले में भी यही हुआ। मेरे कुछ पोस्ट अचानक हटा दिए गए। कारण बताया गया—Advertising Standards का उल्लंघन, Fraudulent Behaviour, Untrustworthy Account जैसी गंभीर आरोप।

हैरानी की बात यह रही कि:

  • जिन पोस्ट्स को AI ने हटाया,
  • वही पोस्ट्स Manual Review के बाद Restore कर दिए गए।

अगर पोस्ट ग़लत थे ही नहीं, तो सज़ा क्यों? अगर गलती AI की थी, तो दंड इंसान को क्यों?

यही वह सवाल है जो आज हज़ारों क्रिएटर्स पूछ रहे हैं।


अकाउंट Restricted, मगर गलती किसकी?

मेरे Facebook Business Account पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी गईं:

  • Ads चलाने पर रोक
  • Audience creation बंद
  • Live और Calls की सुविधा रोकी गई

यह सब तब, जब कोई भी सरकारी या कानूनी उल्लंघन नहीं था। Reach, जो कभी लाखों में रहती थी, अचानक गिरने लगी। Followers तक पोस्ट पहुँचना बंद हो गया।

लोग पूछने लगे—आपके पोस्ट पर लाइक क्यों नहीं आ रहे?

जवाब सीधा है—जब पोस्ट दिखेगी ही नहीं, तो लाइक कहाँ से आएँगे?


Support System या Automated Maze?

Meta Support Team से कई बार बातचीत हुई। Calls आए, Tickets खुले, फिर बंद हो गए।

एक तरफ़ कहा गया—Your profile is active and earning recommended। दूसरी तरफ़—Profile Restricted

एक एजेंट कुछ कहता है, दूसरा कुछ और। कोई स्पष्ट उत्तर नहीं। यह सिस्टम इंसान के लिए नहीं, बल्कि मशीन के हिसाब से बना हुआ लगता है।


यह सिर्फ़ मेरी कहानी नहीं है

YouTube जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर भी कई बड़े क्रिएटर्स—जैसे Manoj Dey—इस मुद्दे को उठा चुके हैं। Financial या Educational कंटेंट को भी AI के ज़रिये बार‑बार Takedown किया जाता है।

सवाल यह नहीं है कि कंटेंट किसके पक्ष में है या विपक्ष में। सवाल यह है कि क्या AI को अभिव्यक्ति का अंतिम निर्णायक बना देना सही है?


अभिव्यक्ति की आज़ादी: मशीन नहीं, इंसान का अधिकार

भारतीय संविधान हमें Right to Freedom of Speech and Expression देता है। यह अधिकार मशीन के विवेक पर नहीं छोड़ा जा सकता।

AI डेटा समझ सकता है, लेकिन भावना नहीं

वह यह नहीं समझ पाता कि कोई बात तंज में कही गई है या नफ़रत में। वह circumstantial evidence नहीं जोड़ सकता।

जब तक AI इंसान नहीं बनता—और शायद कभी बने भी नहीं—तब तक मानव अभिव्यक्ति पर अंतिम अधिकार मनुष्य के पास ही रहना चाहिए।


निष्कर्ष

यह लेख किसी कंपनी के ख़िलाफ़ नफ़रत नहीं है। यह एक समय रहते दी गई चेतावनी है।

अगर AI सेंसरशिप पर आज सवाल नहीं उठाए गए, तो कल बहुत देर हो जाएगी।

टेक्नोलॉजी हमारी मदद के लिए है—हमारी आवाज़ दबाने के लिए नहीं।

Aware News 24 इसी उद्देश्य से यह सवाल उठा रहा है—

अभिव्यक्ति मशीन की नहीं, इंसान की चीज़ है।

राधे राधे।

By Shubhendu Prakash

Shubhendu Prakash – Hindi Journalist, Author & Founder of Aware News 24 | Bihar News & Analysis Shubhendu Prakash एक प्रतिष्ठित हिंदी पत्रकार, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जो Aware News 24 नामक समाधान-मुखी (Solution-Oriented) न्यूज़ पोर्टल के संस्थापक और संचालक हैं। बिहार क्षेत्र में स्थानीय पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक विश्लेषण के लिए उनका नाम विशेष रूप से जाना जाता है। Who is Shubhendu Prakash? शुभेंदु प्रकाश 2009 से सक्रिय पत्रकार हैं और बिहार के राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी विषयों पर गहन रिपोर्टिंग व विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। वे “Shubhendu ke Comments” नाम से प्रकाशित अपनी विश्लेषणात्मक टिप्पणियों के लिए भी लोकप्रिय हैं। Founder of Aware News 24 उन्होंने Aware News 24 को एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में विकसित किया है जो स्थानीय मुद्दों, जनता की समस्याओं और समाधान-आधारित पत्रकारिता को प्राथमिकता देता है। इस पोर्टल के माध्यम से वे बिहार की राजनीति, समाज, प्रशासन, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास से जुड़े मुद्दों को सरल और तार्किक रूप में प्रस्तुत करते हैं। Editor – Maati Ki Pukar Magazine वे हिंदी मासिक पत्रिका माटी की पुकार के न्यूज़ एडिटर भी हैं, जिसमें ग्रामीण भारत, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण पत्रकारिता की जाती है। Professional Background 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों में कार्य 2012 से सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में अनुभव 2020 के बाद पूर्णकालिक डिजिटल पत्रकारिता पर फोकस Key Expertise & Coverage Areas बिहार राजनीति (Bihar Politics) सामाजिक मुद्दे (Social Issues) लोकल जर्नलिज़्म (Local Journalism) टेक्नोलॉजी और डिजिटल मीडिया पब्लिक इंटरेस्ट जर्नलिज़्म Digital Presence शुभेंदु इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय हैं, जहाँ वे Aware News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग, राजनीतिक विश्लेषण और जागरूकता-उन्मुख पत्रकारिता साझा करते हैं।

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