लेखक: Aware News 24 डेस्क
देश की 16वीं जनगणना से पहले सरकार ने स्व-गणना (Self Enumeration) पोर्टल शुरू किया है, जिसके साथ एक अहम बदलाव चर्चा में है — लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर नई गाइडलाइन।
क्या है नया नियम?
सरकार द्वारा जारी FAQ के अनुसार:
👉 अगर कोई लिव-इन कपल अपने रिश्ते को
“स्थिर संघ (stable union)” मानता है,
तो उन्हें जनगणना में विवाहित जोड़े के रूप में गिना जाएगा।
यह फैसला सामाजिक संरचना में बदलते रिश्तों को
आधिकारिक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्व-गणना पोर्टल: क्या है सुविधा?
जनगणना 2026 में पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल विकल्प दिया गया है:
- नागरिक खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे
- यह सुविधा दोनों चरणों में उपलब्ध होगी:
- मकान सूचीकरण और आवास गणना (HLO)
- जनसंख्या गणना
👉 इसका उद्देश्य है
- प्रक्रिया को आसान बनाना
- डेटा की सटीकता बढ़ाना
पहले चरण में क्या-क्या पूछा जाएगा?
1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
घर से जुड़े सवाल
- भवन और जनगणना संख्या
- फर्श, दीवार और छत की सामग्री
- घर की स्थिति और उपयोग
परिवार से जुड़े सवाल
- घर में रहने वाले लोगों की संख्या
- विवाहित जोड़ों की संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम और लिंग
सामाजिक और आर्थिक जानकारी
- जाति (SC/ST/अन्य)
- उपयोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार
- बुनियादी सुविधाएं (पानी, बिजली आदि)
- वाहन और अन्य संपत्ति
विश्लेषण: सामाजिक बदलाव की आधिकारिक मान्यता?
लिव-इन रिलेशनशिप को “विवाहित” के रूप में गिनने का प्रावधान कई संकेत देता है:
1. बदलती सामाजिक वास्तविकता
👉 शहरी भारत में लिव-इन अब सामान्य हो रहा है
👉 सरकार डेटा में इस बदलाव को शामिल कर रही है
2. नीति निर्माण पर असर
👉 परिवार संरचना के नए आंकड़े मिलेंगे
👉 भविष्य की नीतियां अधिक वास्तविक डेटा पर आधारित होंगी
3. विवाद की संभावना
👉 पारंपरिक सोच वाले वर्गों में विरोध हो सकता है
👉 “विवाह की परिभाषा” पर बहस तेज हो सकती है
निष्कर्ष: डेटा ही नीति का आधार बनेगा
जनगणना सिर्फ गिनती नहीं,
👉 यह देश की सामाजिक तस्वीर होती है।
इस बार:
- डिजिटल सिस्टम
- नए सामाजिक मानदंड
- विस्तृत डेटा
👉 यह सब मिलकर भारत की बदलती संरचना को
और स्पष्ट रूप से सामने लाएंगे।
