लेखक: Aware News 24 डेस्क
बिहार की राजनीति में एक बार फिर पोस्टर और प्रतीकों के जरिए संदेश दिया जा रहा है — “25 से 30, फिर से नीतीश”। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दावा है कि नीतीश कुमार अभी भी सत्ता समीकरण के केंद्र में हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वे अब भी “निर्णायक” हैं या “परिवर्तनीय”?
नीतीश: स्थिर भी, परिवर्तनशील भी
पिछले दो दशकों में:
- नीतीश कुमार 9 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं
- भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल — दोनों के साथ सरकार बना चुके हैं
- 2005 के बाद से लगभग लगातार सत्ता में बने रहे
👉 यानी बिहार में सत्ता बदली, गठबंधन बदले
👉 लेकिन “चेहरा” वही रहा
यह उन्हें राजनीति का “constant + variable” दोनों बनाता है।

राजनीतिक सफर: संघर्ष से सत्ता तक
- 1977 और 1980 में चुनाव हार
- 1985 में पहली बड़ी जीत
- 1989 से लगातार संसद और विधानसभा में मौजूदगी
- 2005 में पहली स्थिर सरकार — जिसे “विकास मॉडल” माना गया
👉 सड़क, सामाजिक न्याय, महिला आरक्षण जैसे फैसलों ने
उन्हें एक प्रशासनिक नेता की पहचान दी
गठबंधन की राजनीति: सिद्धांत या रणनीति?
नीतीश कुमार की सबसे बड़ी पहचान उनकी राजनीतिक लचीलापन (ideological flexibility) रही है:
- 2013: BJP से अलग
- 2015: RJD के साथ
- 2017: फिर NDA में वापसी
- 2022: फिर महागठबंधन
- 2024: फिर NDA
👉 सवाल उठता है —
यह सिद्धांत आधारित राजनीति है या सत्ता आधारित रणनीति?

2024 के बाद की स्थिति: मजबूरी या समझौता?
2024 लोकसभा चुनाव के बाद:
- NDA सरकार की स्थिरता में JD(U) की भूमिका अहम
- लेकिन केंद्र में सीमित मंत्री पद
- पहले की तुलना में कम राजनीतिक दबदबा
👉 यह बदलाव संकेत देता है कि
नीतीश अब “किंगमेकर” से “सपोर्टिंग पिलर” बनते दिख रहे हैं
विवाद और सवाल: नेतृत्व पर उठते संदेह
हाल के दिनों में:
- भाषणों में गड़बड़ी
- सार्वजनिक मंचों पर असहज व्यवहार
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
👉 इससे उनके स्वास्थ्य और सक्रियता को लेकर सवाल उठे
👉 लेकिन विपक्ष भी सीधा व्यक्तिगत हमला करने से बच रहा है
बिहार का ग्राउंड रियलिटी: विकास बनाम चुनौतियां
- 34% परिवार ₹6000 से कम मासिक आय पर निर्भर
- बेरोजगारी और पलायन अब भी बड़ा मुद्दा
- राज्य का कर्ज GDP का ~37% तक पहुंचने का अनुमान
👉 यानी बुनियादी ढांचा बना
👉 लेकिन आर्थिक बदलाव अधूरा रहा
सबसे बड़ा सवाल: “नीतीश के बाद कौन?”
यह बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल है:
- कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं
- पार्टी में कई दावेदार
- जातीय समीकरण भी बाधा
👉 इससे यह संकेत मिलता है कि
JD(U) का भविष्य नीतीश पर अत्यधिक निर्भर है
विश्लेषण: 2026 चुनाव — आखिरी अध्याय?
आने वाला विधानसभा चुनाव तय करेगा:
👉 क्या नीतीश कुमार आखिरी बार सत्ता में आएंगे?
👉 या यह उनकी राजनीतिक यात्रा का “स्वान सॉन्ग” होगा?
फिलहाल स्थिति यह कहती है:
- वे कमजोर हुए हैं, लेकिन खत्म नहीं
- विकल्प मौजूद हैं, लेकिन मजबूत नहीं
निष्कर्ष: नेता या समीकरण?
नीतीश कुमार अब सिर्फ एक नेता नहीं,
बल्कि एक राजनीतिक समीकरण बन चुके हैं।
👉 जो उनके साथ है, उसे बढ़त मिलती है
👉 जो उनके खिलाफ है, उसे रणनीति बनानी पड़ती है
2026 का चुनाव तय करेगा —
👉 वे इतिहास बनेंगे
👉 या फिर इतिहास लिखेंगे
